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कौन होगा प्रधान मंत्री 2019

ज्योतिषियों के अनुसार कौन बनेगा देश का प्रधानमंत्री न 2019 में



ज्योतिषियों ने कर दी भविष्यवाणी, 2019 में यह बनेंगे देश के प्रधानमंत्री।
वाराणसी. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी के प्रसिद्द ज्योतिषाचार्य पं.ऋषि द्विवेदी ने 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर महतत्वपूर्ण जानकारी दी है। ज्योतिषार्चाय ने यह जानकारी पीएम मोदी और बीजेपी की कुंडली को देखने के बाद दी है।
दरअसल, बीजेपी अपने कर्यकाल के सबस खराब समय से गुजर रही है। बीजेपी पर बड़े आरोप लग रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकर इस समय कमजोर लग रही है। जिसका फायदा विपक्ष उठा सकता है। ऐसे में आने वाले चुनाव में पार्टी को नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है।
ज्योतिषाचार्य ने यह जानकार दी कि, 2019 लोकसभा चुनाव में किसकी सरकार बन सकती है और कौन मुंह के बल गिर सकता है। ऐसा पं.ऋषि द्विवेदी ने पीएम मोदी औऱ पार्टी दोनों की कुंडली मिलाकर गणना करने के बाद बताया।

कुंडली के अध्ययन के अनुसार, बीजेपी की जन्म 6 अप्रैल 1980 में हुआ है। इसके तहत बीजेपी की कुंडली बनायी जाए तो मिथुन लग्र वृश्चिम राशि की कुंडली है। बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2012 से सूर्य की महादशा आरंभ हुई है। सूर्य की महादशा में बीजेपी को लाभ होना शुरू हुआ। इसके बाद ही बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का प्रत्याशी बनाया गया। उस समय पीएम मोदी की कुंडली में अच्छा समय था। जिसकी वजह से बीजेपी और पीएम मोदी की कुंडली दोनों के ग्रह योग के चलने के साथ ही पहली बार केंद्र में बहुमत की सरकार बनी।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, सूर्य की महादशा छह: साल के लिए होती है। जिसके चलते बीजेपी ने कई राज्यों में चुनाव जीता। पर अब बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2017 से सूर्य की महादशा में शुक्र की महादशा आ गई। इसका फल अच्छा नहीं होता है। इसी कारण बीजेपी का खराब समय शुरू हो गया है। बीजेपी पर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं। खास बात है कि, यह समय 10 साल के लिए है। जिसकी वजह से बीजेपी को भविष्य में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यानी 2019 में बीजेपी के अच्छे दिन नहीं है।

क्या कहती है पीएम मोदी की कुंडली

अब बात की जी रही है पीएम मोदी की कुंडली की। पीएम मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न वृश्चिक राशि की है। साथ ही पीएम मोदी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा चल रही है। जो वर्ष 2021 तक चलेगी। पीएम मोदी की कुंडली में चन्द्रमा की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है, यह स्थिति 3 मार्च 2019 तक रहेगी। इसके ठीक बाद कुंडली में केतु का अतर आयेगा। पीएम मोदी के लिए केतु भाग्य बदलने वाला साबित हो सकता है। पीएम मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न की है और इस लगन में केतु लाभकारी होता है। इसके अतिरिक्त वृश्चिक लग्र के लिए बृहस्पति पंचमेश में होता है। यह स्थिति बहुत अच्छी मानी गई है। तो बता दें कि, मार्च के शुरूआत से ही पीएम मोदी का फिर से अच्छे दिन वाले हैं। यानी अच्छा समय शुरू हो जाएगा। जिसका फायदा पीएम मोदी को 2019 चुनाव में होगा और एक बार पीएम नरेन्द्र मोदी के चलते बीजेपी को बहुमत या फिर सबसे अधिक सीट मिल सकती है।

पीएम मोदी के कारण ही बीजेपी को लाभ होगा। तो यहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने का दावा तो नहीं कर सकते, लेकिन ज्योतिषाचार्य ने इतनी भविष्यवाणी की है कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और फिर से देश की सत्ता पीएम मोदी के हाथों में होगी।

लग्नेश यदि दशम स्थान में हो तो क्या होगा आपके जीवन का कैरियर और कर्म

ज्योतिषीय ज्ञान
दशम स्थान गत लग्नेश


       कुंडली का सर्वाधिक पवित्र व महत्वपूर्ण स्थान है दशम स्थान | यदि किसी स्थान से दशम स्थान बली हो तो वह स्थान विशेष शाश्वत स्वाभाव का माना जाता है | उदाहरणार्थ दूसरे स्थान का विश्लेषण किया जाये तो दूसरे स्थान से दशम स्थान, अर्थात एकादश स्थान पर ध्यान देना चाहिए | यदि एकादश स्थान में शुभ गृह हों तथा एकादश स्थान बली हो तो दूसरे स्थान को स्वतः बल प्राप्त हो जाता है | इसी प्रक्रार यदि षष्ठ स्थान को जानना चाहें तो षष्ट स्थान से दशम स्थान अर्थात तृतीय स्थान को देखें, यदि तृतीय स्थान बली है तो यह कहा जा सकता है कि षष्ट स्थान स्वतः बली हो गया है तथा जातक रोगमुक्त जीवन प्राप्त करेगा |
       इसलिए लग्न का बलाबल दशम स्थान से देखना होगा | दशम भाव गत लग्नेश अद्वितीय बल प्राप्त करता है यह ऐसे व्यक्ति का सूचक है जो स्वाभाविक भाग्यवान है तथा जो शुभ गुणों से युक्त होगा व जीवन में उन्नति करेगा ऐसा व्यक्ति जो कुशल प्रशासक बनेगा | ऐसे व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अपने पूर्वकर्मों के शुभ फलों का उपभोग करने ही इस जीवन में जन्म लेते हैं |
·         दशम स्थान गत लग्नेश भाव-संधि में नहीं होना चाहिए, ऐसा होने पर लग्न का बलक्षय होता है | इस संबंध में किसी भी केंद्र में लग्नेश भाव-संधि में स्थित नहीं होना चाहिए |  भाव-संधि दो प्रकार की होति है |
·         आरोह भाव-संधि
·         अवरोह भाव-संधि
जब गृह नवम स्थान से दशम स्थान में प्रवेश कर रहा हो, तो नवम भाव के उपरांत प्रथम भाव-संधि को आरोह भाव-संधि कहते हैं |
जब कोई गृह भाव-मध्य से अंतिम दस अंशो में जा रहा हो तो इसे अवरोह भाव-संधि कहते हैं |
शुब गृह आरोह भाव-संधि में तथा क्रूर गृह अवरोह भाव-संधि में स्थित होने चाहिए |
जब कोई गृह भावारम्भ बिंदु पर स्थित हो तो वह सर्वाधिक बली गृह बन जाता है | भावारम्भ स्वामी सर्वाधिक बली स्वामी है, वे स्थानविशेष के लिए सर्वप्रथम विश्वस्त उत्तरदायी गृह है | वे उस स्थान के अधिपति से भी अधिक मग्त्वापूर्ण होते हैं |
उदहारण
       यदि सप्तम स्थान मकर राशी का हो तथा भावारम्भ बिंदु पांच अंश व बयालीस मिनट पर हो, जो उत्तरा शाढा नक्षत्र (जिसका स्वामी सूर्य है)  में आता है, तो सप्तम स्थान का प्रथम दायित्व सूर्य पर होगा न कि शनि पर, हालाँकि वह राशीश है |
·         अतः सूर्य पर दुष्प्रभाव देखने होंगे तथा वैवाहिक विलम्ब अथवा विच्छेद के लिए सूर्य ही उत्तरदायी होगा |
यदि स्थानाधिपति तथा भावारम्भ नक्षत्रेश सम- संबंध अथवा संयोग बनायें तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है |  यदि महादाशाधिपति अंतर्दाशाधिपति स्थानविशेष के भावारम्भ नक्षत्रेश से युत हो, तो उस स्थान के कार्कतवों का फलित होना सुनिश्चित है |
शुभ गृह होने से दशम स्थान गत लग्नेश आरोह के समय में अतिशुभ माना जाता है | क्रूर गृह होने पर यह अवरोहम में शुभ माना जायेगा तथा भाव-संधि बिंदु में प्रत्येक गृह चाहे वह शुभ हो या क्रूर, शुभ होगा | हालाँकि दशम स्थान में लग्नेश अत्यंत बली माना जाता है, परन्तु वह दिग्बलाहीन नहीं होना चाहिए |
लग्नेश होकर शुक्र दशम स्थान गत होने पर जातक को दीर्घ, परन्तु निस्सार जीवन प्रदान करेगा | ऐसा दीर्घ जीवन किस प्रयोजन का होगा यदि इसके सहायक अवयव ही विद्यमान न हों |
मंगल या सूर्य की लग्नेश होकर दशम स्थान में स्थिति व्यक्ति को शुभ गुण युक्त अलौकिक भाग्यशाली तथा जीवन में सद्गुणों का भोगने वाला बनाती है | दशम स्थान कर्म स्थान होने से इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जातक इस संसार में  उच्चकोटि या महत्व के कर्म करने हेतु जन्मा है, अर्थात कर्मयोगी होगा |
जातक को अत्यंत शुभ पूर्व पुण्य प्राप्त होगा | इस उद्देश्य हेतु पंचम नवम तथा क्रमशः उनके स्वामी व प्रतिस्थायियों में अन्य सहायक तत्व होने चाहिए | व्यक्ति सदैव सफल होगा तथा दूसरों के  प्रति उसका व्यवहार अत्यंत सहायतापूर्ण होगा | व्यक्ति अल्पावस्था में ही जीविकोपार्जन प्रारंभ कर देगा |
जातक कि आर्थिक स्थिति सुद्रढ़ नहीं होगी, परन्तु उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होगा | इस हेतु लग्नेश का आरोग्यकारक चन्द्र से संबंध देखना होगा इससे व्यक्ति के जीवन में संभावित कष्टों कि मात्रा का भी अध्ययन किया जा सकता है |  व्यक्ति स्वनिर्मित व्यक्तित्वा तथा जीवन में स्वनिर्मित व्यक्ति तथा स्वावलंबी होगा |
दशम स्थान गत लग्नेश केन्द्रधिपति दोष से मुक्त होना चाहिए सामान्यतः लग्नेश पर कदापि केन्द्रधिपति दोष नहीं लगता क्योंकि वह एक केंद्र के साथ साथ एक कोण का भी स्वामी होता है | तो ये दोष कब लागू होगा ?
यह केवल तभी संभव है जब लगेंश किसी अन्य केंद्र का भी स्वामी हो, जो केवल ब्रहस्पति तथा बुध अर्थात मिथुनम, कन्या, धनु व मीन लग्न के लग्नेश होने पर लागू हो सकता है |
दशम स्थान गत लग्नेश दर्शाता है कि जातक के जनम के पश्चात् उसके पिता को अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा | यह जातक के परिवार में एकमात्र पुत्र होने का भी सूचक है | इसके लिए लग्नेश की सूर्य से युति या द्रष्टि होनी चाहिए या नक्षत्रों का संबंध होने चाहिए |


यदि सूर्य लग्नेश होकर दशम स्थान में स्थित हो, तो जातक अपने पिता कि एकमात्र पुत्र संतति होगी |  यह जातक के अपने पारिवारिक पारम्परिक व्यवसाय में संलग्न होने का भी सूचक है

कुंडली कैसे देखें? भाग 3

कुंडली कैसे देखें? भाग 3

दोस्तों!
पिछले पोस्ट में हमने देखा कि प्रत्येक भाव का क्या काम है अब हम देखेंगे कि प्रत्येक राशि का स्वामी कौन ग्रह होता है।

१२ राशियों के नाम एवम उनके स्वामी की जानकारी निम्न है ---
मेष का स्वामी = मंगल ,
वृष का स्वामी = शुक्र ,
मिथुन का स्वामी = बुध ,
कर्क का स्वामी = चन्द्रमा ,
 सिंह का स्वामी = सूर्य ,
कन्या का स्वामी -= बुध ,
 तुला राशी का स्वामी = शुक्र,
वृश्चिक का स्वामी = मंगल ,
धनु का स्वामी = गुरु ,
मकर का स्वामी = शनि ,
कुम्भ का स्वामी = शनि ,
मीन का स्वामी = गुरु |

अब हम पुनः आते है उस कुंडली में जिसमे कि ( https://shivaastrology.blogspot.in/2017/07/blog-post_9.html) लग्न भाव में संख्या 8 अर्थात वृश्चिक राशि लिखी होती है। इससे हम अब बता सकते है कि उस व्यक्ति की लग्न वृश्चिक और स्वामी मंगल है। दोस्तों अगर हमने किसी व्यक्ति की लग्न और स्वामी को पहचान लिया तो समझिये हमने 10% ज्योतिष सीख ली।
आगे की पोस्ट में हम बात करेंगे प्रत्येक राशि के सामान्य लक्षण और प्रत्येक ग्रह का सामान्य स्वभाव के बारे में।
क्रमशः........  

कुंडली कैसे देखें ? भाग 2


कुंडली के बारह भाव और उनसे क्या जानें- 

दोस्तों मैंने पिछले पोस्ट में कुंडली के भाव कैसे देखें ये बताया था अब ये जानेंगे की प्रत्येक भाव क्या बताता है और हमें किस विषय के बारे में जानना हो तो उस विषय को उस भाव से देखें। उदाहरण के लिए अगर हमे जानना हो कि किसी व्यक्ति के विवाह के बारे में विचार करना हो तो उसकी कुंडली का सप्तम भाव देखेंगे। इसी प्रकार करिअर के लिए दसवां भाव देखेंगे।

प्रथम भाव – First House 

तनु भाव  प्रथम भाव से व्यक्ति की शारीरिक संरचना का विचार किया जाता है. पूरे शरीर की बनावट इस भाव से देखी जाती है. शरीर का रंग, रुप, बाल,  सहनशक्ति, ज्ञान, स्वभाव जीवन के सुख-दुख,  स्वास्थ्य, शरीर का बलाबल, मानसिक प्रवृ्त्ति को बताता है.

द्वितीय भाव – Second House

धन भाव  इस भाव से व्यक्ति की वाणी, कुटुम्ब,धन आदि का विचार किया जाता है. इस भाव से दांई आँख का भी विचार किया जाता है. विद्या,चेहरा,खान-पान की आदतें आदि भी इसी भाव से देखी जाती हैं. सच और झूठ, जीभ, मृ्दु वचन, मित्रता, शक्ति, आय की विधि आदि बातों का विचार भी इस भाव से किया जाता है. यह भाव मारक भाव भी है. इस भाव से मृ्त्यु के बारे में भी पता चलता है. कुण्डली का प्रथम मारक स्थान है.


तृ्तीय भाव – Third House

सहज भाव  इस भाव से छोटे भाई-बहन, धैर्य,पराक्रम,व्यक्ति का पुरुषार्थ, छोटी यात्राएँ,दाहिना कान और दाहिना हाथ, शक्ति,वीरता,बन्धु,मित्रता,नौकर, दास-दासी. यह मजबूत इच्छा शक्ति का भी भाव है.  महर्षि पराशर के अनुसार तृ्तीय भाव उपदेश या धार्मिक उपदेश का भी होता है. दूसरों को ताप पहुंचाना भी इस भाव का कारकत्व है.

चतुर्थ भाव – Fourth House

सुख भाव  यह भाव भवनों का प्रतीक है. घर, घर से निकालना, वाहन,माता,घर का सुख,झूठा आरोप, मकान, खेतीबाड़ी, वाहन, आदि इस भाव से देखा जाता है. भौतिक सुखों की प्राप्ति, अनुभूति, माता से वात्सल्य का सुख, माता के पूरे भविष्य का पता इस भाव से चलता है. ऎशों – आराम के सभी साधन, पद मिलेगा या नहीं इस भाव से देखते हैं. जीवन के प्रति नकारात्मक और सकारात्मक दृ्ष्टिकोण यहीं से पता चलता है. सामान्य शिक्षा, मन के भाव, मस्तिष्क, भावुकता आदि इस भाव से देखा जाता है. इस भाव से छाती और फेफड़ों को देखते हैं.

पंचम भाव – Fifth House

पुत्र भाव [संतान भाव]  यह संतान प्राप्ति का भाव है. शिक्षा का भाव है. शिक्षा का स्तर कैसा होगा, इस भाव से पता चलेगा. विवेक का भाव, पूर्व जन्म के संचित कर्म, पंचम भाव से प्रेम संबंध, लेखन कार्य भी पंचम भाव से देखते हैं. पंचम भाव से राज शासन, मंत्रीत्व, शास्त्रों का ज्ञान, लॉटरी, पेट, स्मृ्ति आदि का विचार किया जाता है. इस भाव से ह्रदय, पेट का ऊपरी भाग का विचार करते हैं.

षष्ठ भाव – Sixth House

अरि भाव [शत्रु भाव] इस भाव से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष  हर प्रकार के शत्रुओं का विचार किया जाता है. शारीरिक और मानसिक शत्रु [काम, क्रोध, मद, लोभ] अहंकार, सेवा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा [competition in service] रोग की प्रारम्भिक अवस्था, ऋण, जैसे जीवन यापन और व्यापार आदि के लिये ऋण आदि लेना इसी भाव से. छठा भाव सर्विस भाव भी है. चिकित्सकों की कुण्डली में यह भाव बली होता है. वकीलों का व्यवसाय भी यहीं से देखा जाता है.   सौतेली मां, झगडा़ – मुकदमा, पानी से भय, जानवर से भय, मामा – मौसी को भी इस भाव से विचारते हैं. इस भाव से गुर्दे, पेट की आँतें तथा हर तरह के व्यसनों का विचार किया जाता है.

सप्तम भाव – Seventh House

दारा या कलत्र भाव इस भाव से जीवन साथी का विचार करते हैं. उसका रुप-रंग, शिक्षा, व्यवहार सभी का विचार इस भाव से किया जाता है. दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा या उसमें कलह होगा, सभी का विचार इस भाव से होता है. यह साझेदारी का भाव है. आधुनिक समय में इस भाव से व्यापार तथा व्यापार में साझेदारी की गुणवत्ता का विचार करते हैं. इस भाव से जीवन के हर क्षेत्र की साझेदारी को देखा जाता है. प्रजातंत्र में यह जनता का भाव भी है. नेताओं की कुण्डली में यदि यह भाव बली है तो वह नेता जनता में लोकप्रिय होगा.   इस भाव से मध्यम स्तर की यात्राएं देखते हैं इस भाव से travels for fun and travels for business भी देखते हैं. यह कुण्डली का दूसरा मारक स्थान है.

अष्टम भाव – Eighth House

इस भाव से पैतृ्क सम्पति, विरासत, अचानक आर्थिक लाभ, वसीयत आदि अष्टम भाव के सकारात्मक पक्ष है. लम्बी बीमारी, मृ्त्यु का कारण, यौन संबंध, दाम्पत्य जीवन, अष्टम भाव का नकारात्मक पक्ष है. इस भाव से जननेन्द्रियों का विचार करते हैं.

नवम भाव – Ninth House

भाग्य भाव नवम भाव से आचार्य, गुरुजन, पिता और अपने से बडे़ सम्मानित लोगों का विचार किया जाता है. यह भाव भाग्य भाव भी कहलाता है. इस भाव से लम्बी समुद्र यात्रा, तीर्थ यात्राएं, भाई की स्त्री, जीजा, अपने बच्चों की संतान का विचार भी इस भाव से होता है.   आध्यात्मिक प्रवृ्तियाँ, भक्ति या धर्म अनुराग, सीखना या ज्ञान प्राप्त करना, धार्मिक और न्याय से संबंधित व्यक्तियों के बारे में इस भाव से विचार करते हैं. एक अच्छा नवम भाव कुण्डली को बहुत बली बनाता है. नवम भाव से जाँघें देखते हैं.

दशम भाव – Tenth House

कर्म स्थान यह कर्म का क्षेत्र है. रोजगार के लिये जो कर्म करते है वो दशम भाव से देखे जाते हैं. किस आयु में कर्म की प्राप्ति होगी, कर्म का क्षेत्र क्या होगा, किस तरह से समय का सदुपयोग या दुरुपयोग करते हैं. रोजगार कैसा और कब शुरु होगा, रोजगार में टिकाव रहेगा या नहीं, रोजगार में कितना मान मिलेगा , स्वयं का मान-सम्मान आदि बातों का विचार इस भाव से किया जाता है.   प्रसिद्धि, सम्मान, आदर, प्रतिष्ठा तथा व्यक्ति की उपलब्धियाँ दशम भाव से देखी जाती है. दशम भाव से घुटनों का विचार किया जाता है.

एकादश भाव – Eleventh House

आय या लाभ भाव इस भाव से आय, लाभ, पद प्राप्ति, प्रशंसा, बडे़ भाई – बहन, पुत्र वधु, बांया कान और बांहें देखते हैं. व्यापार से लाभ – हानि और सभी प्रकार के लाभ इस भाव से देखे जाते हैं. जो कर्म जातक ने किये हैं उनका श्रेय इस भाव से मिलता है. इस भाव से पिण्डलियाँ और टखने का विचार करते हैं.

द्वादश भाव – Twelfth House

व्यय भाव  जिंदगी का अंतिम पडा़व, हर तरह के व्यय, हानि, बरबादी, जेल, अस्पताल, षडयंत्र आदि इस भाव से देखे जाते हैं. खुफिया पुलिस, दरिद्रता, पाप, नुकसान, शत्रुता, कैद, शयन सुख, बायां नेत्र, गुप्त शत्रु, निंदक आदि का विचार इस भाव से किया जाता है.  आधुनिक सन्दर्भ में विदेश यात्रा, विदेश में व्यवसाय, विदेशों में रहना आदि का विचार इस भाव से किया जाता है. इस भाव से पैर और पैर की अंगुलियों का विचार करते हैं. जो लोग आध्यात्म से जुडे़ हैं उनकी कुण्डली में द्वादश भाव का बहुत महत्व होता है. आध्यात्मिक जीवन के संकेत और मोक्ष के विषय में द्वादश भाव से विचार करते हैं

कुंडली कैसे देखें? भाग 1


कैसे देखे कुंडली?


दोस्तों!
हम अपनी कुंडली तो बनवा लेते है लेकिन उसके बारे में जानते नहीं है कम से कम आपको इतना तो मालूम ही होना चाहिए कि ये जो कुंडली है वो क्या है । ये जो चित्र देख रहे है आप ये एक व्यक्ति की कुंडली है जिनकी जन्म तिथि है 01 अगस्त 1985, जन्म समय है दोपहर के 2 बजे और जन्म स्थान है दिल्ली।

आईये कुंडली के बारे में जानते है-
इसमें 12 खाने है और हर खाने में 1 संख्या लिखी हुई है। ये संख्या है वो दरअसल राशी की संख्या है जो की इस प्रकार है-
1 मेष
2 वृष
3 मिथुन
4 कर्क
5 सिंह
6 कन्या
7 तुला
8 वृश्चिक
9 धनु
10 मकर
11 कुम्भ
12 मीन


तो इस कुंडली में आप देखेंगे की सबसे ऊपर वाले खाने के स्थान पर संख्या 8 लिखी हुई है, देखिये जहाँ पर ल. लिखा है, ल. मतलब की लग्न,  इसका मतलब की लग्न वाले स्थान पर 8 लिखा है और 8 नम्बर हम बता चुके है कि वृश्चिक राशी है। तो समझे आप व्यक्ति का लग्न हुआ वृश्चिक। इस लग्न से हम बाएं ओर को गिनना शुरू करे तो अगला खाना जिसमे कि 9 लिखा हुआ ये कुंडली का दूसरा भाव है इसी प्रकार जिसमे 10 लिखा है वो तीसरा भाव हुआ और जिसमे 11 लिखा है वो चौथा भाव हुआ और जिसमे 12 लिखा है वो पांचवा भाव हुआ और जिसमे 1 लिखा है वो छठा भाव हुआ। जिसमे 2 लिखा है वो खाना सातवाँ भाव हुआ और जिसमे 3 लिखा है वो खाना 8 भाव हुआ। जिसमे 4 लिखा है वो खाना नवां भाव हुआ और जिसमे 5 लिखा है वो दसवां भाव हुआ और जिसमे 6 लिखा है वो ग्यारहवां भाव हुआ और जिसमे 7 लिखा है वो बारहवां भाव हुआ।

एक बात और कुंडली में भाव तो निश्चित रहते है। इन भाव की गिनती इसी प्रकार होगी।
आगे की पोस्ट हम प्रत्येक खाने  (भाव) के  बारे में बताएँगे।
क्रमशः.........

Why should believe on Astrology ज्योतिष पर विश्वास क्यों करें


नमस्कार मित्रों!
आज के दौर में जब इंसान अपने जीवन में तमाम परेशानियों का शिकार है और जीवन में सुख और शांति पाना चाहता है। दोस्तों! हमने तरक्की तो बहुत कर ली परन्तु आज भी हर चीज हमारे नियंत्रण में नही है।हम मेहनत तो बहुत करते है परन्तु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, कोई बीमार है, कोई आर्थिक तंगी का शिकार है, किसी की शादी नही हो रही और किसी को नौकरी नही मिल रही तो कोई व्यापर में घाटा उठा रहा है, कोई पाप करता है और फिर भी मजे से जिन्दगी काटता है और कोई बहुत शुभ कर्म करता है तब भी कष्ट उठा रहा है,  वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगो की विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन जब हम अभी कही गयी बातो  का लगातार शिकार होते है तब हमे लगता है कि इस संसार में भाग्य नाम की एक चीज भी है।

इसी भाग्य पर बात करता है हमारा ज्योतिष। मित्रों ! तुलसीदास जी ने कहा है 
" कर्म प्रधान विश्व रची राखा।"
मतलब कि ये संसार कर्म आधारित है । अर्थात अच्छे कर्म करोगे तो अच्छा फल और बुरे कर्म का फल बुरा होता है। हमारा भाग्य भी हमारे कर्मों से मिलकर बना है। पिछले जन्म के संस्कार हमारे इस जन्म के भाग्य बनाते है।  तो आप समझे कि भाग्य क्या है।
दोस्तों! हमारे प्राचीन ऋषियों ने ज्योतिष का विकास इसलिए किया ताकि हम अपने भविष्य के बारे में जान सके और अपने समय का सदुपयोग कर अपने कर्मो को समय रहते सुधार कर सकें।
कई लोगों के मन में अवधारणा है कि ये तारे और नक्षत्र हमारे भाग्य का निर्धारण कैसे कर सकते है? मैं उन लोगों से सहमत हूँ कि हाँ तारे और नक्षत्र हमारे भाग्य का निर्धारण नहीं कर सकते है, क्यूंकि ये निर्धारक नहीं संकेतक हैं। आप सोचिये कि अगर आसमान में बदल दिख रहें है तो मैं कहूँगा कि बारिश होने वाली है, अगर गर्मी के मौसम में गरमी बहुत बढ़ जाती है तो हम लोग कह देते है कि आज आंधी आएगी। जब कहीं भूकंप आता है तो वहां के पशु पक्षियों में बहुत ही बेचैनी देखी जाती है। लेकिन जब हम ये सब बातें बोल रहे होते है तो हम अन्धविश्वासी नहीं होते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति ज्योतिष के आधार पर कुछ कहता है तो फिर ये अन्धविश्वास कैसे? ये भी एक विज्ञान है जिसे हमारे ऋषि मुनियों ने संसार के कल्याण के लिए संसार को दिया।
ज्योतिष में हम लोग नक्षत्र और तारों की गति के आधार पर भविष्यवाणी करते हैं। हमे जो तारा मंडल प्रथिवी से लगातार दिखाई देते हैं हमने उनको अपना आधार मान लिया। इन तारा मंडलों को बारह राशियों में विभाजित कर लिया जो कि है - 
1. मेष Aries
2. वृष Tauras
3. मिथुन gemini
4. कर्क cancer
5 .सिंह leo
6. कन्या virgo
7. तुला libra
8. वृश्चिक scorpio
9. धनु sagittarius
10. मकर capricorn
11. कुम्भ Aquarius
12. मीन pieces
इसके बाद हमने ग्रह देखे जो कि हमारे काफी पास है और इन सब राशियों पर भ्रमण करते प्रतीत होते हैं।
इनके नाम है 
सूर्य,  चन्द्र, मंगल , बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि
दो छाया ग्रह- राहू और केतु

हम इन्ही के गति के आधार पर भविष्य कथन करेंगे।
मैं आपको ज्योतिष का पूरा ज्ञान दूंगा और आपको इस लायक बना दूंगा कि आप किसी भी व्यक्ति का भाग्य बता सकेंगे आगे की जानकारी अगले लेख में दूंगा और you tube पर आपको विडियो भी देखने को मिलेंगे। तो हमारे साथ जुड़े रहिये। अगर आपको ये लेख अच्छा लगा हो तो कृपया कमेंट कर अपनी राय अवश्य दें। 
 क्रमशः...............

क्यों हो परेशान जब आप कम सकते हो ऑनलाइन घर बैठे कोई मार्केटिंग नहीं कोई इन्वेस्टमेंट नही

हम बात कर रहे हैं घर बैठे कमाने के बारे में | हो सकता ये आपको आश्चर्य जनक लगे लेकिन इसमें कोई नयी बात नहीं है दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं...

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