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पुणे की वैज्ञानिक ने यादव रसोइये के ऊपर केस दर्ज कराया क्योंकि उसके बने खाने से उसका धर्म भृष्ट हुआ।





"पुणे में मौसम विभाग की वैज्ञानिक मेधा विनायक खोले को जब ये पता चला कि उनके यहां खाना बनाने वाली ब्राह्मण नहीं है तो वह सन्न रह गई। वैज्ञानिक ने इसके बाद अपनी 60 वर्षीय नौकरानी के खिलाफ धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है क्यों इससे उसके देवता अपवित्र हो गए …इसे अपना अपमान समझ निर्मला यादव ने पलटकर थाने में मेधा के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। "-- दिलीप मंडल की फेस बुक वाल से


जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोग सामाजिक असमानता दूर करने के नाम पर कितना भी दलितों के घर खाना खाने का दिखावा कर लें। शिक्षा और पद भी इनकी मानसिकता नहीं बदल पाते। आरक्षण के मुद्दे पर सवर्ण ज्ञान देते हैं कि अब तो देश में समानता आ गई है, अब आरक्षण की कोई जरुरत नहीं। जमीनी हकीकत इस दिखावे से बहुत अलग है।

आप सोच भी नहीं सकते कि आजादी के इतने साल बाद भी आप किस तरह की मानसिकता वालों के देश में रह रहे हैं। जातिवाद की घटिया मानसिकता से उपजा जाति का दंश क्या होता है, यह पुणे में एक ब्राह्मण वैज्ञानिक के यहां खाना बनाने वाली से बेहतर कौन जान सकता है ?

पुणे में मौसम विभाग की वैज्ञानिक मेधा विनायक खोले को जब ये पता चला कि उनके यहां खाना बनाने वाली ब्राह्मण नहीं है तो वह सन्न रह गई। वैज्ञानिक ने इसके बाद अपनी 60 वर्षीय नौकरानी के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज करा दिया।

पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में वैज्ञानिक डॉ. मेधा विनायक खोले ने उनके घर में कार्यरत खाना बनाने वाली 60 वर्षीय निर्मला यादव पर धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है.

मेधा के अनुसार, उन्हें अपने घर में गौरी गणपति और श्राद्ध का भोजन बनने के लिए हर साल ब्राह्मण और सुहागिन महिला की ज़रूरत होती है. मेधा पुणे के मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात है.



क्या गंगा-यमुना का पानी लोगों को कायर बनाता है?

योगी आदित्यनाथ ने जब अखिलेश यादव के हटने के बाद मुख्यमंत्री निवास का गोबर और गंगाजल से शुद्धिकरण कराया, तो अखिलेश विरोध में एक शब्द नहीं बोल पाए. यह कहकर रह गए कि – दोबारा सीएम बनने
पर मैं भी शुद्धिकरण कराऊंगा।

वहीं महाराष्ट्र की निर्मला यादव को जब ब्राह्मण साइंटिस्ट मेधा खोले ने जाति के आधार पर अपमानित किया, तो निर्मला पलटकर आईं और थाने पहुंचकर मेधा के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी।

न दैन्यम, न पलायनम!!



निर्मला की जवाबी शिकायत के बाद मेधा के हाथपांव फूल गए और घबराकर उन्होंने निर्मला यादव के खिलाफ अपनी FIR वापस ले ली.

सामाजिक समता की लड़ाई विंध्याचल पर्वत के दक्षिण में ही मजबूती से लड़ी जा रही है.

निर्मला यादव का जोखिम समझिए. अब उसे पुणे शहर के किसी संभ्रांत घर में काम नहीं मिलेगा. लेकिन उन्होंने अपमान सहने से इनकार करने का साहस दिखाया. थाने चली गईं. यही इंसान के लक्षण हैं. गुस्सा आना चाहिए.

इस खबर से यह साबित होता है कि आज भी भारतीय सवर्ण समाज मे जातिवाद ,छुआछूत और भेदभाव भयंकर रूप में हावी है तथा चाहे कोई वैज्ञानिक ही क्यों न हो ,उसकी मानसिकता उतनी ही दूषित ,मैली ,कूपमण्डूक और अवैज्ञानिक ही बनी रहती है|दुःख की बात है कि आज भी एक मराठा नौकरानी को छद्म ब्राह्मणी बनकर रसोइये की नौकरी करनी पड़ती है और पकड़े जाने पर मुकदमा झेलना पड़ता है ,शर्म आती है ऐसी जातिवादी सोच की वैज्ञानिक पर और उस व्यवस्था पर जो ऐसे हास्यास्पद मामलों में मुकदमे दर्ज कर लेती है और उनकी जांच भी करती है ,दलितों के खिलाफ निकलने वाले मराठा मोर्चे इस अपमानजनक घटना पर मूक बने रहते है.

जाति छिपाने का आरोप नकारते हुए महिला रसोइए ने भी मौसम विभाग की वैज्ञानिक के ख़िलाफ़ केस किया।


पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में वैज्ञानिक डॉ. मेधा विनायक खोले ने उनके घर में कार्यरत खाना बनाने वाली 60 वर्षीय निर्मला यादव पर धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है।

मेधा के अनुसार, उन्हें अपने घर में गौरी गणपति और श्राद्ध का भोजन बनने के लिए हर साल ब्राह्मण और सुहागिन महिला की ज़रूरत होती है। मेधा पुणे के मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात है।

एनडीटीवी इंडिया की ख़बर के अनुसार, मेधा का आरोप है कि साल 2016 में निर्मला ने ख़ुद को ब्राह्मण और सुहागिन बताकर ये नौकरी ली और उस समय उन्होंने अपना नाम निर्मला कुलकर्णी बताया था जबकि वह दूसरी जाति से हैं। डॉ. मेधा के मुताबिक इस साल 6 सितंबर को उनके गुरुजी ने बताया कि निर्मला ब्राह्मण नहीं हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, मेधा निर्मला की जाति जानने के लिए धयारी स्थित उनके घर तक गई और निर्मला के ब्राह्मण और सुहागिन न होने की बात मालूम पड़ने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत करने का फैसला लिया।

एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मेधा ने पुणे के सिंहगढ़ रोड पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है. पुलिस ने निर्मला यादव के खिलाफ धारा 419 (पहचान छुपा कर धोखा देने), 352 (हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 504 (शांति का उल्लंघन करने के इरादे से एक व्यक्ति का अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया है।

दूसरी तरफ निर्मला का कहना है कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है। परिवार चलाने के लिए उन्हें यह झूठ बोलना पड़ा.

मेधा का कहना है कि निर्मला से पूछताछ करने पर निर्मला ने कहा कि आर्थिक समस्या होने के कारण उन्होंने ऐसा किया साथ ही निर्मला ने उन्हें गुस्से में गाली दी और मारने झपटीं. मेधा का कहना है कि उन्हें 15 से 20 हज़ार तक आर्थिक नुकसान भी हुआ है।

पुणे ब्राह्मण महासंघ ने इसे मालकिन और नौकरानी के बीच का विवाद बताते हुए कहा है कि इस मामले को जाति की दृष्टि से नहीं देखकर किसी की व्यक्तिगत भावना आहत होने के नज़रिये से देखना चाहिए. इस बीच राष्ट्रवादी युवती कांग्रेस ने डॉ. मेधा खोले के घर के सामने विरोध प्रदर्शन किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, निर्मला यादव ने इन सभी आरोपों को ख़ारिज किया है. निर्मला कहती हैं, ‘मैं कभी डॉ. मेधा के पास नौकरी के लिए नहीं गई वो ख़ुद यहां आई थीं और न ही मैंने कभी अपनी जाति छुपाई. मैंने उनके घर तीन उत्सवों पर खाना बनाया पर उन्होंने अभी तक कोई पैसे नहीं दिए. जब मैंने पैसे मांगे तो उन्होंने मुझे आठ हज़ार रुपये कुछ दिन में देने का वादा किया. मैंने उनकी बात पर विश्वास कर लिया क्योंकि वो बड़ी अधिकारी हैं. मैंने कभी नहीं छुपाया की मैं मराठा समुदाय से हूं और एक विधवा हूं।'

‘बीते 6 सितंबर को मेधा मेरे घर आईं और मुझ पर जाति छुपाने का आरोप लगाया. उन्होंने ये तक कहा कि मेरे कारण उनके भगवान अपवित्र हो गए हैं. उनकी शिकायत के बाद मैंने भी उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है।’

पुलिस के अनुसार डॉ. मेधा के ख़िलाफ़ धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचना), 506(आपराधिक धमकी देना) और 584 (जानबूछ का अपमान करना) के ठत एक ग़ैर-संज्ञेय अपराध दर्ज किया है।

निर्मला यादव के दामाद तुषार काकडे जो कि शिवसंग्राम संगठन के पदाधिकारी हैं साथ ही मराठा आंदोलन में एक सक्रिय सहभागी भी कहते हैं, ‘हम डॉ. खोले की कड़ी निंदा करते हैं जो कि एक वैज्ञानिक होते हुए भी कहती हैं कि उनकी भावना एक दूसरी जाति की विधवा महिला के हाथ से खाना बनवाने के कारण आहत हो गई है।'

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति और सांभाजी ब्रिगेड ने भी प्रेस रिलीज़ निकालते हुए इस घटना की निंदा की और इसे क़ानून का उल्लंघन बताया।

सवाल ये है कि हमारे उत्तर प्रदेश में ऐसी बहुत सी विनायक खोले है, शायद हमें रोज ही दो चार होना पड़ता हो इन लोगों से  , तो हम स्वयं सोचे कि हम किस राह जा रहे हैं??????

अगर नए कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो जैसे जवानी बीत रही है वैसे ही बुढापा भी बीतेगा।

✍पुरानी पेंशन

 *जवाब*  की  आशा के साथ


1. यह कि हमारे कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन बहाली 24 सूत्रीय मांगपत्र में एक नंबर पर क्यों नही रखते?

2. यहकि हमारे संगठन पुरानी पेंशन पर टेबल टाक क्यों नहीं करते ? यदि हुई है तो बताते क्यों नहीं?

           "  1 अप्रैल 2005 के बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद कर NPS  लागू कर दी गई ।
ज्ञातव्य है कि NPS  और ओपीएस अर्थात पुरानी पेंशन स्कीम है क्या?"


                          पुरानी पेंशन योजना

*1* पुरानी पेंशन योजना कर्मचारी द्वारा की गई सेवाओं के फलस्वरूप बिना किसी अंशदान के सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।          

*2* पुरानी पेंशन योजना की कोई धनराशि शेयर मार्केट के अधीन नहीं होती है।

 *3*  पुरानी पेंशन योजना पर सरकार पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है ।

 *4*  पुरानी पेंशन के  तहत धनराशि जीपीएफ कटौती को आवश्यकतानुसार कर्मचारी लोन के रूप में आहरित कर सकता है।

 *5* पुरानी पेंशन योजना में प्रतिवर्ष दो बार महंगाई भत्ता प्राप्त होता है।

 *6* पुरानी पेंशन योजना में पे कमीशनके अनुसार पेंशन वृद्धि होती है।

 *7*  पुरानी पेंशन में फंड मैनेजर की कोई व्यवस्था नहीं है।

 *8* पुरानी पेंशन में पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था पूर्णतया सरकार द्वारा की जाती है।

 *9*  सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी का जो वेतन होता है उसका अर्ध वेतन  पेंशन के रूप में निर्धारित हो जाता है।

 *10* *सेवानिवृत्ति के समय 16 माह का वेतन कर्मचारी को ग्रेच्यूटी के रूप में प्रदान किया जाता है ।

 *11*  ग्रेच्युटी पर कोई टैक्स नहीं लगता है ।



                      * *नवीन पेंशन योजना** 

 *1* एनपीएस नवीन पेंशन योजना नई परिभाषित अंशदाई पेंशन योजना में कर्मचारी के वेतन एवं DA का 10% की कटौती की जाती है ।

 *2* नव परिभाषित पेंशन योजना शेयर मार्केट आधारित योजना है ।
*3*  NPS  में कोई निश्चित पेंशन धनराशि नहीं है अर्थात किसी माह 10000 किसी माह 50000 पेंशन मिल सकती है नहीं भी मिल सकती है।
 *4*  नवीन पेंशन योजना पूरी तरह शेयर मार्केट पर आधारित होने के कारण सरकार कोई सुरक्षा की गारंटी नहीं प्रदान करती है ।

 *5*  नवीन पेंशन योजना के तहत काटी गई धनराशि से कोई पैसा आहरित नहीं कर सकते हैं यदि कर सकते हैं तो तीन बार प्रक्रिया जटिल है।

 *6* नवीन पेंशन योजना में पेंशन प्लान लेने के बाद महंगाई भत्ता इत्यादि देय नहीं है ।

 *7* पेंशन योजना को तीन फण्ड मैनेजर sbi, uti,  lic ही संचालित करेंगे  सरकार से कोई मतलब न रहेगा ।
मैनजरों के  वेतन व भत्ते कर्मचारी द्वारा जमा की गई पेंशन हेतु धनराशि से काटे जाएंगे ।

 *8*  नवीन पेंशन योजना में पारिवारिक पेंशन आपके बचे हुए फंड के धन से ही उपलब्ध कराई जाती है ।

 *9* कर्मचारी 60 वर्ष या  50 वर्ष सरकार के अधीन हो कर  सेवा करेंगे और सरकार उन्हें NSDL प्राइवेट कंपनी के सहारे छोड़ कर अपना पल्ला झाड़ लेगी।



  स्वाभिमान सम्मान कर्मचारी का खतरे में है *बुढ़ापा खतरे* में है या कम शब्दों में कहें तो हमारा सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य खतरे में है आज की संस्कृति में आने वाले समय की संस्कृति में जमीन आसमान का नहीं दिन रात का अंतर होगा आनेवाले समय में कोई किसी की सेवा नही करेगा इसलिए हमारा बुढ़ापा हमारा भविष्य खतरे में है
 वर्तमान में हमारी सैलरी पर्याप्त है फिर भी हम माह के अन्तमे  सैलरी की प्रतीक्षा करने लगते हैं अतः हम बुढ़ापे के लिए बचत नही कर पा रहे हैं।

 न कर पाएंगे रिटायरमेंट के बाद  न वेतन होगा न ही पेंशन होगी चिन्तन कीजिये जीवन का स्वरुप क्या होगा बुढ़ापा सम्मान से नही कटेगा दुर्दिन होंगे
जरा सोचिए
हमारी समस्याहै   लड़ेगा कौन?
हमारा दर्द दूर करेगा कौन ,?
दूसरा कोई नहीं हमे ही संघर्ष करना होगा

 पश्चिम बंगाल केरल व त्रिपुरा में लागू तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं?

 *6th पे कमीशन ने कहा था पेंशन कर्मचारी का लंबित वेतन है*
अतः आये सभी विभाग के कर्मचारियों का एक संगठन बनाकर  पुरानी पेंशन के लिए एक साथ संघर्ष करें ।


अभी नही तो कभी नहीं.....….......

मौलिक अधिकार बना निजता का अधिकार, इससे आपको क्या फर्क पड़ेगा



मौलिक अधिकार बना निजता का अधिकार, इससे आपको क्या फर्क पड़ेगा

भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को कई मौलिक अधिकार दिए हैं। बहस इस बात को लेकर थी कि क्या निजता का अधिकार, मौलिक अधिकारों में आता है या नहीं। आखिरकार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से इसे अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है।



इस फैसले का आधार से कोई संबंध नहीं

सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का आधार से कोई संबंध नहीं है। 9 जजों की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सिर्फ निजता के अधिकार पर अपना फैसला सुनाया है। इस बेंच में आधार पर कोई बात नहीं हुई। आधार निजता के अधिकार का हनन है या नहीं, इस पर तीन जजों की एक अन्य बेंच सुनवाई करेगी।



क्या हैं मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को कुछ मौलिक अधिकार दिए हैं। इन मौलिक अधिकार को व्यक्ति के विकास के लिए अहम माना जाता है।

1. समानता का अधिकार

2. स्वतंत्रता का अधिकार

3. शोषण के खिलाफ अधिकार

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

5. सांस्कृति और शिक्षा का अधिकार

6. संवैधानिक उपचार का अधिका



इन जजों ने सुनाया फैसला

इन नौ जजों की बेंच ने निजता को मौलिक अधिकार माना।

1. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर

2. जस्टिस चमलेश्वर

3. जस्टिस आरके अग्रवाल

4. जस्टिस एसए बोबड़े

5. जस्टिस एएम सापरे

6. जस्टिस आरएफ नरिमन

7. जस्टिस जीवाई चंद्रचूड़

8. जस्टिस संजय किशन कौल

9. जस्टिस एस एब्दुल नजीर





'सुप्रीम' फैसले का क्या फर्क पड़ेगा?

इस मामले में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी से बात की गयी। उन्होंने बताया कि अब किसी मामले में अगर आधार से जुड़ी या कोई अन्य निजी जानकारी मांगता है तो आप आपत्ति जता सकते हैं। अगर आपको लगता है कि फलां व्यक्ति आपके निजी जीवन में दखल दे रहा है तो आप कोर्ट में जाकर याचिका पेश कर सकते हैं और कोर्ट उस पर सुनवाई करेगी। इसमें आंखों का रंग, डीएनए, ब्लड से जुड़ी जानकारी, फिंगर प्रिंट आदि सरकार अपने पास रख सकती है। सरकार हमें विश्वास दिलाएगी कि यह डाटा चोरी नहीं होगा और हमारी निजता भंग नहीं होगी।



सरकारी योजनाओं में निजी जानकारी का क्या?

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी अब आधार जरूरी हो गया है। आप नाम, पता देने से तो इनकार नहीं कर सकते, लेकिन स्वामी के अनुसार अन्य जानकारियां देने से उपभोक्ता मना कर सकते हैं। विवाद की स्थिति में उपभोक्ता अदालत की शरण में जा सकता है और कह सकता है कि हमें विश्वास दिलाएं कि हम जो जानकारी दे रहे हैं वह किसी और के पास नहीं जाएगा।



मोबाइल फोन नंबर से आधार लिंक करना जरूरी है?

सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार बना दिया है तो ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि जिस तरह से निजी टेलिकॉम कंपनियां मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने की बात कर रही हैं उसका क्या होगा। इस मामले में सुब्रह्मण्यम स्वामी में कहा कि जब आधार पर ही चुनौती हो जाएगी तो इन कंपनियों को भी रुकना पड़ेगा।



निजता की श्रेणी कैसे तय होगी?

निजता की श्रेणी को लेकर भी सवाल हैं। क्योंकि हो सकता है किसी व्यक्ति के लिए उसकी कोई खास जानकारी निजता की श्रेणी में आती हो, लेकिन दूसरों के लिए नहीं। ऐसे में निजता की श्रेणी कैसे तय हो। इस बारे में भी स्वामी से बात करते हुए कहा कि इसके बारे में भी अदालत ही तय करेगी।


  सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया है। नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मती से निजता के अधिकार पर यह फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि निजता एक मौलिक अधिकार है। निजता राइट टू लाइफ का हिस्‍सा है। निजता के हनन करने वाले कानून गलत हैं। कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है और यह संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के तहत आता है। मामले में बहस के बाद कोर्ट ने गत दो अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब पांच न्यायाधीशों की पीठ आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

यूं शुरू हुई निजता के अधिकार पर बहस
निजता के अधिकार पर बहस इसलिए शुरू हुई, क्योंकि आधार योजना को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलील है कि बायोमीट्रिक डाटा और सूचनाएं एकत्र करने से उनके निजता के अधिकार का हनन होता है। सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व फैसलों में आठ न्यायाधीशों और छह न्यायाधीशों की पीठ कह चुकी है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे में भारत सरकार और याचिकाकर्ताओं ने निजता के अधिकार का मुद्दा बड़ी पीठ के द्वारा सुने जाने की अपील की थी। इस पर नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित हुई। पीठ के अध्यक्ष प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर हैं। उनके अलावा पीठ में जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस एएम सप्रे और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल है



विरोध में सरकार की दलीलें
-ये सन्निहित अधिकार है, लेकिन ये कॉमन लॉ में आता है।
-निजता हर मामले की परिस्थितियों पर तय होती है।
-संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर इसे मौलिक अधिकारों में शामिल नहीं किया था।
-कोर्ट मौलिक अधिकार घोषित करता है, तो यह संविधान संशोधन होगा जिसका कोर्ट को अधिकार नहीं है।
-आंकड़े एकत्रित करना निजता के तहत नहीं आता।
-निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया, तो तकनीक का सहारा लेकर गुड गर्वनेंस के प्रयास रुक जाएंगे।

यह भी पढ़ेंः अब आधार कार्ड को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने पर होगी SC में सुनवाई

समर्थन में याचिकाकर्ताओं की दलीलें
-निजता सम्मान से जीवन जीने के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
-मुख्य अधिकार मौलिक अधिकार है, तो उसका हिस्सा भी माना जाएगा।
-कोर्ट कई फैसलों में निजता के अधिकार को मान्यता दे चुका है।
-निजता को स्वतंत्रता व जीवन के अधिकार से अलग करके नहीं देख सकते।
-अमेरिका और अन्य देशों में निजता को मौलिक अधिकार माना गया है।

होने जा रहा है अन्य पिछड़ा वर्ग में बदलाव





दैनिक जागरण संपादकीय             



केंद्र सरकार ने अब अन्य पिछड़े वर्ग में एक नया वर्ग बनाने की ठान ली है, क्योंकि केंद्र सरकार में बैठे लोगों को ऐसा लगता है कि जो आशा अन्य पिछड़े वर्ग के गठन के समय की गई थी वो अभी तक पूरी नहीं हुई है, क्योंकि अन्य पिछड़े वर्ग में सभी जातियों को बराबर माना गया है जबकि ऐसा नही है; अन्य पिछड़े वर्गों की कुछ जातियां दबंग है और उनका समाज में वर्चस्व है । जबकि कुछ जातियां इतनी अधिक पिछड़ी है कि आरक्षण कैसे मिलेगा वो भी शायद उन्हें नही पता है। ओबीसी में कुछ जातियों ने सरकारी नौकरियों में अपना वर्चस्व स्थापित किया जबकि कुछ जातियों का सरकार  में प्रितिनिधित्व शून्य है।

हालांकि कहने को तो ओबीसी में कई हजार जातियां है लेकिन ये भी वर्ग बिभाजित है। एक वर्ग अपने को दूसरे वर्ग से श्रेष्ठ मानता है ।

उम्मीद न छोड़े, और अंतिम पल तक डटें रहें। Don't lose hope. You never know what tomorrow will bring.

                 उम्मीद न छोड़े, और अंतिम पल तक डटें रहें।

जिन्दगी अपनी शुरुआत के साथ अनिश्चितता लिए होती है हम कभी भी कुछ निश्चित नहीं कह सकते हमारे साथ क्या घटना पेश आ सकती है और असल में जीने का यही तो मजा है क्योंकि नहीं तो नयापन क्या रह जायेगा जिन्दगी में |
यही वजह है कि जब भी हम मुश्किल में होते है हमे लगता है अब तो शायद कुछ नहीं बदलेगा और जिन्दगी में उलझनों और समस्याओं की जगह हम अपनी सोच में अधिक उलझने पैदा कर लेती है जबकि जिन्दगी की परेशानियों से तो फिर भी पार पायी जा सकती है लेकिन हम अपने दिमाग में जो धारणाएं बनते है उनकी नकारात्मक Energy हमारी जीवन को प्रभावित करती है और वो भी बड़े बुरे स्तर पर |

ओशो ने एक बड़ी अच्छी बात कही है ” प्रकृति बाधा नहीं है क्योंकि प्रकृति तो एक संगीत है एक हारमनी जो निरंतर चलायमान होने का प्रतीक है जबकि मुश्किलें कई बार केवल इसलिए आती है कि वो हमारे अंदर सुप्त हमारी काबिलियत को जगा सके एक नयी दिशा दे सके ”

इसी तरह जीवन मुश्किलों और खुशियों से भरा एक सामजस्य पूर्ण प्लेटफार्म है जिसे आपको इसकी परिपूर्णता में बड़े अच्छे ढंग से जीना होता है वही जिन्दगी की परिभाषा है  | सोचिये अगर मुश्किलें ही नहीं होंगी तो नयापन क्या रहेगा  | हम ऐसा क्या कर सकते है उस दशा में कोई क्रांति भरा जो हमे सफलता का मज़ा दे  | नहीं न  | तो जरुरी है कि आप उस दौर से गुजरे जिसमे आपको लगे कि ऐसा क्या है मुझ में जो मैं बेहतर कर सकता हूँ अपने लिए और उसके बाद आप पाएंगे कि सफलता के उस मुकाम से आप कभी दूर नहीं थे बस एक direction आपको चाहिए थी जो आपको आपकी निराशा भरी जिन्दगी से वापिस लौटने का सबसे करीबी दरवाजा थी  |
आप कभी अपनी जरूरतों के दूसरे लेवल तक नहीं जाते जिनकी आपको अपने जीवन में वाकई जरुरत है और जिनसे आपकी खुशिया है आप लोगो के नजरिये से खुद को देखते है और असल में यही है जो परेशानी का कारण बनती है हो सकता है आप लोगो की नजर में सफल नहीं हो लेकिन जरा सोचिये क्या इस से वाकई कोई फर्क पड़ता है  | जवाब है नहीं लेकिन अगर आप सोचते है कि इस से पड़ता है तो मैं आपको एक बात साफ़ कर देना चाहता हूँ कि ऐसे में आप खुद की क्षमताओं को भी कम आंकते है  |

किसी भी परेशानी की स्थिति में जडवत बने रहने से अच्छा है आप जिस परेशानी में अभी है उसके बारे में सकारात्मक तरीके से विचार किया जाये नहीं तो आप एक काम कर सकते है एक पेन और पेपर लेकर बैठे और उन बातों पर विचार करें जो आपके पक्ष में मौजूद है और आप पाएंगे कि ऐसे कई छोटे छोटे रस्ते उपलब्ध है जो आपके लिए आपकी मंजिल के बड़े रस्ते तक जाते है बस जरुरत है एक फैसला भर लेने कि आप उन पर अमल करने के लिए कितने तेयार है क्योंकि कुछ भी नहीं करने से अच्छा है कुछ भी करें फिर चाहे जरुरी नहीं वो आपको एकदम से सफलता की और आपका कदम साबित हो ऐसे में आप अपनी गलतियों को सुधारने के लिए हर कदम पर तेयार हो सकते है क्योंकि आपकी छोटी छोटी गलतियाँ ही वो है जो आपको आपकी सफलता के रास्ते में आने वाली रुकावटों में बड़ी गलतियों की संभावनाओं को कम करती है इसलिए आपको अपने दिल और दिमाग से सकारात्मक सोच लिए धीरे धीरे आगे बढे तो आप पाएंगे जल्दी ही जिन्दगी के निराश पहलू से आप काफी आगे निकल चुके है  |

क्यों हो परेशान जब आप कम सकते हो ऑनलाइन घर बैठे कोई मार्केटिंग नहीं कोई इन्वेस्टमेंट नही

हम बात कर रहे हैं घर बैठे कमाने के बारे में | हो सकता ये आपको आश्चर्य जनक लगे लेकिन इसमें कोई नयी बात नहीं है दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं...

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