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हिन्दुओं के लिए क्यों पवित्र है सावन का महिना?

हिन्दुओं के लिए क्यों पवित्र है सावन का महिना?



सभी शिव मंदिरों में श्रावण मास के अंतर्गत विशेष तैयारियां की गई हैं। चारों ओर श्रद्धालुओं द्वारा ‘बम-बम भोले और ॐ नम: शिवाय’ की गूंज सुनाई देगी। शिवालयों में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ नजर आएंगी। धार्मिक पुराणों के अनुसार श्रावण मास में शिवजी को एक बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है।

एक अखंड बिल्वपत्र अर्पण करने से कोटि बिल्वपत्र चढ़ाने का फल प्राप्त होता है। साथ ही शिव को कच्चा दूध, सफेद फल, भस्म, भांग, धतूरा, श्वेत वस्त्र अधिक प्रिय होने के कारण यह सभी चीजों खास तौर पर अर्पित की जाती है।

इसके साथ ही श्रावण मास शिवपुराण, शिवलीलामृत, शिव कवच, शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर मंत्र, शिव पंचाक्षर स्त्रोत, महामृत्युंजय मंत्र का पाठ एवं मंत्र जाप करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश होता है। वैसे इस बार श्रावण 7 अगस्त 2017  तक चलेगा। श्रावण का यह महीना भक्तों को अमोघ फल देने वाला है। माना जाता है कि भगवान शिव के त्रिशूल की एक नोक पर काशी विश्वनाथ की पूरी नगरी का भार है। उसमें श्रावण मास अपना विशेष महत्व रखता है।

सावन सोमवारी की व्रत कथा 
कथानुसार एक बार सनत कुमारो ने भगवान महादेव से पूछा, हे देवों के देव महादेव। कृपा कर ये बतायें कि क्यों आपको सावन माह अति प्रिय है। कुमारो के अनुरोध को स्वीकारते हुए भगवान महादेव ने कहा, देवी सती अपनी योगशक्ति के जरिये अपने पिता दक्ष के घर में शरीर त्याग दी थी।  किन्तु देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने की प्रतिज्ञा की थी। इसी वचनानुसार देवी सती का दूसरा जन्म हिमाचल के घर में रानी मैना के गर्भ से हुई थी। उनके माता-पिता ने कन्या का नाम पार्वती रखा। पार्वती ने सावन के महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत कर महदेव को प्रसन्न किया।
ततश्चात पार्वती का विवाह महादेव से हुआ। अतः महादेव एवम माता पार्वती को सावन माह अति प्रिय है। यह परम्परा आदि काल से वर्तमान काल तक जारी है। सावन माह में कुंवारी कन्यायें सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन सोमवारी की व्रत रखती है।

सोमवार की पूजा विधि
       इस दिन प्रातः काल उठे, स्नान आदि से निवृत होकर भगवान शिवजी, माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी एवम नंदी जी की पूजा करें। पूजा की दिशा पूर्व अथवा उत्तर हो। भगवान शिव जी को पंचामृत से जलधारा स्नान करायें।ततश्चात भगवान शिव जी की ऊजा गंध, फल, फूल, चन्दन, बेलपत्र, भांग-धतूरा, दूर्वा आदि से करें तथा शिव चालीसा का पाठ एवम ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करें। अंत में भगवान शिव जी की आरती करें । शिवजी एवम माता पार्वती से घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करें। 

Why should believe on Astrology ज्योतिष पर विश्वास क्यों करें


नमस्कार मित्रों!
आज के दौर में जब इंसान अपने जीवन में तमाम परेशानियों का शिकार है और जीवन में सुख और शांति पाना चाहता है। दोस्तों! हमने तरक्की तो बहुत कर ली परन्तु आज भी हर चीज हमारे नियंत्रण में नही है।हम मेहनत तो बहुत करते है परन्तु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता, कोई बीमार है, कोई आर्थिक तंगी का शिकार है, किसी की शादी नही हो रही और किसी को नौकरी नही मिल रही तो कोई व्यापर में घाटा उठा रहा है, कोई पाप करता है और फिर भी मजे से जिन्दगी काटता है और कोई बहुत शुभ कर्म करता है तब भी कष्ट उठा रहा है,  वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगो की विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन जब हम अभी कही गयी बातो  का लगातार शिकार होते है तब हमे लगता है कि इस संसार में भाग्य नाम की एक चीज भी है।

इसी भाग्य पर बात करता है हमारा ज्योतिष। मित्रों ! तुलसीदास जी ने कहा है 
" कर्म प्रधान विश्व रची राखा।"
मतलब कि ये संसार कर्म आधारित है । अर्थात अच्छे कर्म करोगे तो अच्छा फल और बुरे कर्म का फल बुरा होता है। हमारा भाग्य भी हमारे कर्मों से मिलकर बना है। पिछले जन्म के संस्कार हमारे इस जन्म के भाग्य बनाते है।  तो आप समझे कि भाग्य क्या है।
दोस्तों! हमारे प्राचीन ऋषियों ने ज्योतिष का विकास इसलिए किया ताकि हम अपने भविष्य के बारे में जान सके और अपने समय का सदुपयोग कर अपने कर्मो को समय रहते सुधार कर सकें।
कई लोगों के मन में अवधारणा है कि ये तारे और नक्षत्र हमारे भाग्य का निर्धारण कैसे कर सकते है? मैं उन लोगों से सहमत हूँ कि हाँ तारे और नक्षत्र हमारे भाग्य का निर्धारण नहीं कर सकते है, क्यूंकि ये निर्धारक नहीं संकेतक हैं। आप सोचिये कि अगर आसमान में बदल दिख रहें है तो मैं कहूँगा कि बारिश होने वाली है, अगर गर्मी के मौसम में गरमी बहुत बढ़ जाती है तो हम लोग कह देते है कि आज आंधी आएगी। जब कहीं भूकंप आता है तो वहां के पशु पक्षियों में बहुत ही बेचैनी देखी जाती है। लेकिन जब हम ये सब बातें बोल रहे होते है तो हम अन्धविश्वासी नहीं होते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति ज्योतिष के आधार पर कुछ कहता है तो फिर ये अन्धविश्वास कैसे? ये भी एक विज्ञान है जिसे हमारे ऋषि मुनियों ने संसार के कल्याण के लिए संसार को दिया।
ज्योतिष में हम लोग नक्षत्र और तारों की गति के आधार पर भविष्यवाणी करते हैं। हमे जो तारा मंडल प्रथिवी से लगातार दिखाई देते हैं हमने उनको अपना आधार मान लिया। इन तारा मंडलों को बारह राशियों में विभाजित कर लिया जो कि है - 
1. मेष Aries
2. वृष Tauras
3. मिथुन gemini
4. कर्क cancer
5 .सिंह leo
6. कन्या virgo
7. तुला libra
8. वृश्चिक scorpio
9. धनु sagittarius
10. मकर capricorn
11. कुम्भ Aquarius
12. मीन pieces
इसके बाद हमने ग्रह देखे जो कि हमारे काफी पास है और इन सब राशियों पर भ्रमण करते प्रतीत होते हैं।
इनके नाम है 
सूर्य,  चन्द्र, मंगल , बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि
दो छाया ग्रह- राहू और केतु

हम इन्ही के गति के आधार पर भविष्य कथन करेंगे।
मैं आपको ज्योतिष का पूरा ज्ञान दूंगा और आपको इस लायक बना दूंगा कि आप किसी भी व्यक्ति का भाग्य बता सकेंगे आगे की जानकारी अगले लेख में दूंगा और you tube पर आपको विडियो भी देखने को मिलेंगे। तो हमारे साथ जुड़े रहिये। अगर आपको ये लेख अच्छा लगा हो तो कृपया कमेंट कर अपनी राय अवश्य दें। 
 क्रमशः...............

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