हम बात कर रहे हैं घर बैठे कमाने के बारे में | हो सकता ये आपको आश्चर्य जनक लगे लेकिन इसमें कोई नयी बात नहीं है दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो न तो ऑफिस जाते हैं न ही किसी बॉस की अकड़ सहते हैं लेकिन महीने के अंत में औसत भारतीय से ज्यादा कमाई कर ले जाते हैं| नीचे एक वेबसाइट का बेहतरीन लिंक प्राप्त हुआ है जो कि कई प्रतिष्ठित कम्पनियों के माध्यम से आपको कमाई का मौका दे रही है| एक बात और ये बिलकुल फ्री है|
Maha Bindas. महा बिंदास
जिंदगी में कामयाबी उन्ही को मिलती है जो होते हैं कुछ खास। कुछ लोग दूर होकर भी होते है हमारे दिल के बहुत ही पास। जो सबके चेहरे पर ला दे खुशी , उन्हें कहते है बिंदास। जो नाकाम लोगो को भी कामयाब कर दे, उन्हें कहते हैं महा बिंदास।
क्यों हो परेशान जब आप कम सकते हो ऑनलाइन घर बैठे कोई मार्केटिंग नहीं कोई इन्वेस्टमेंट नही
हम बात कर रहे हैं घर बैठे कमाने के बारे में | हो सकता ये आपको आश्चर्य जनक लगे लेकिन इसमें कोई नयी बात नहीं है दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो न तो ऑफिस जाते हैं न ही किसी बॉस की अकड़ सहते हैं लेकिन महीने के अंत में औसत भारतीय से ज्यादा कमाई कर ले जाते हैं| नीचे एक वेबसाइट का बेहतरीन लिंक प्राप्त हुआ है जो कि कई प्रतिष्ठित कम्पनियों के माध्यम से आपको कमाई का मौका दे रही है| एक बात और ये बिलकुल फ्री है|
क्यों हम मनाएं गणतंत्र उत्सव ?
आज हम सब लोग राष्ट्र का 70 वां गणतंत्र का उत्सव मना रहे हैं| सभी
के मन में अपार ख़ुशी है हमें भी ख़ुशी हो रही है| मेरा मानना ये है कि हम जिस चीज
का उत्सव मना रहे हैं वो जरुर मनाएं परन्तु उसके पीछे के महत्व और कारण को अवश्य
समझे जिससे कि हमे इस बात का एहसास रहे कि हम क्या हैं और ये उत्सव क्यों ?
इसी आर्यावर्त देश में महाजनपद काल के समय में लिच्छवी, चेटक,
मिथिला और वज्जी (वैशाली) जैसे बड़े गणराज्य थे| इन गणराज्यों में शासन चलाने के
लिए लोकतान्त्रिक तरीके प्रयोग किये जाते थे| गण का अर्थ होता है एक कबीला जिसमे एक
प्रकार के लोग हों जिनका रहन सहन और बोल- चाल एक जैसी हो; और गणों के समूह को
जिसमे शासन भी स्वयं किसी न किसी गण द्वारा किया जाता हो उस राज्य को गण कहते थे,
किन्तु यहाँ राजा बनाने की प्रक्रिया लोकतान्त्रिक थी न की वंशानुगत | उस समय
गणराज्य एक प्रकार से बड़े व्यापारियों के ही संघ थे जिसमे सभी वर्णों के लोगों को
राजा बनने का अधिकार था| परन्तु इनमे एक ही कमी थी कि इनकी सैन्य शक्ति कमजोर थी|
इन गणराज्यों में बौध धर्म का विस्तार बहुत ही शीघ्रता से हुआ तथा लोगों का ध्यान
शांति पूर्वक जीवन जीने और मृत्यु के बाद के मोक्ष आदि प्राप्त करने की और अधिक
हुआ| क्युकी यह एक नियम है कि जब समाज में शांति और उतम राज व्यवस्था होती है तभी
व्यापार फलता फूलता है और कला संस्कृति आदि का उत्थान होता है, केवल उस समय ही
मनुष्य मोक्ष प्राप्ति आदि के लिए सोच सकता है ये सब मैं इसलिए बता रहा हूँ कि
ताकि आप जान सके कि हम कहाँ थे और कहाँ आ गये हैं|
तत्पश्चात इसी देश में उन गणराज्यों को समाप्त कर दिया जाता है और
एक बड़ा राज्य मौर्य युग के समय स्थापित किया जाता है| उसमे भी जब तक चाणक्य जैसे
लोग रहते हैं व्यवस्था उत्तम रहती है, राज
काज नियम पूर्वक और लोगों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है; परन्तु
विष्णुगुप्त का राष्ट्र धर्म सदैव लोगों के हितों से बढ़कर होता है और सैन्य शक्ति
से मजबूत एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होता है| अशोक के समय उसे और वृद्धि प्राप्त
होती है परन्तु कलिंग जैसे एक बड़े गणराज्य का अंत भी कर दिया जाता है जो कि सम्राट
अशोक की केवल राज्य आकांक्षा की वजह से होता है| हालाँकि आप कह सकते हैं कि अशोक
का ह्रदय परिवर्तन उसी वजह से हुआ | लेकिन इसके साथ ही हमने उस अंतिम आशा को भी खो
दिया जो कि गण राज्य में लोगों के द्वारा, लोगों पर ,लोगों के लिए शासन करने के
सिद्धांत पर आधारित थी| फिर आप जानते ही कैसे छल पूर्वक पुष्यमित्र शुंग द्वारा
अपने ही राजा की हत्या कर दी जाती है और ब्राह्मण धर्म का पुनरुथान करने के नाम पर
कैसी हिंसा होती है| लोगों से उनके अधिकार छीन लिए जाते है और स्मृति का खेल रचा
जाता है| इनके पुरोहित रहे पतंजलि वो भी
कर्मकांडी थे| चलिए पुरानी बातें यहीं
खत्म करते हैं और नए दौर में आते हैं|
जब भारत आजाद हो कर एक संविधान से चलने वाला राष्ट्र बन गया है और
हम नागरिकों को ही सब अधिकार प्राप्त हैं| यहाँ आप देखें और समझें कि इस नए
गणतंत्र का क्या अर्थ है क्या यह एक शब्द मात्र है जो कि संविधान निर्माताओं ने
यूँ ही रख दिया या फिर कुछ सोच समझ कर रखा| मुझे तो ऐसा ही लगता है कि इस शब्द का
चुनाव कुछ सोच समझ कर ही किया गया होगा|
नये अर्थ में गण हैं हम लोग भारत के नागरिक और तंत्र है ये व्यवस्था
, ये सिस्टम जो कि हमारे द्वारा चलाया जा रहा है| इसमें शासक भी हम ही हैं और
शासित भी हम ही हैं और शासन भी हमारे कल्याण के लिए ही है| गणतंत्र मतलब लोगों का तंत्र
या प्रजातंत्र या लोकतंत्र|
लेकिन कहाँ हैं लोकतंत्र? ये ही एक मात्र प्रश्न है जो बस पूछा
जाना चाहिए बाकि तो सब हो समझ ही जायेंगे|
लोक तंत्र होता है नागरिकों द्वारा न कि प्रजा द्वारा ! कोई प्रजा राजा से अधिकार नहीं मांगती न ही मांग
सकती है, क्यूंकि प्रजा होती है राज तंत्र में, जिसमे राजा ही सर्वोच्च होता है|
अधिकार हमेशा नागरिकों को ही मिलता है और अधिकार की दूसरी बात ये है कि ये हमेशा
छीनकर ही लिया जाता है ये अधिकार कोई आपको देगा नहीं| क्या हम अपने अधिकारों के लिए जागरूक हैं ?
आज
इस 70वें गणतंत्र 26 जनवरी 2019 पर हम ये प्रश्न स्वंय से पूछें कि क्या हम एक
नागरिक बन पायें हैं? एक नागरिक का अधिकार होता है कि उसने जिनको सत्ता सौपीं है
उनसे सवाल करे उनसे पूछे कि जो जिम्मेदारी दी गयी थी वो पूरी की या नहीं | नागरिक सवाल
करता है अपने मत का मूल्य समझता है न की थोड़े से लालच के लिए अपना मत किसी को भी
दे दे | नागरिक अपने अधिकार और कर्तव्य के बारे में सजग रहता है| अधिकार और
कर्तव्य केवल वो नहीं है जो कि संविधान में लिखे हैं | अरे भाई वो तो मूल अधिकार और
मूल कर्तव्य हैं|
आज का सबसे बड़ा काम यही है कि हम एक सच्चे नागरिक बनें| लेकिन ये
सब लोग, ये सब किताबें धर्मग्रन्थ चाहें वो किसी भी धर्म का क्यों न हो, ये बिकाऊ
मीडिया, ये नेता चाहें वो राजनितिक हों या फिर आपके धर्म गुरु, मौलवी, पादरी कोई
भी , या आपके जाति के नेता, या आपके क्षेत्र के नेता ये सब आपको नागरिक नहीं बनने देंगे न ही चाहेंगे कि आप
नागरिक बनें क्यूंकि नागरिक के पास आंख होती है, कान होतें हैं, जिव्हा होती है और
सबसे खास की नागरिक के पास विवेक होता है, तर्क होता है |
बाकि हम लोग आज इस गण तंत्र उत्सव को जरुर मनाएं और अच्छे से मनाएं लेकिन
बाकि हम लोग आज इस गण तंत्र उत्सव को जरुर मनाएं और अच्छे से मनाएं लेकिन
आज हम ये भी सोचें कि इस नागरिकता की दौड़ में हम कहाँ तक आयें हैं और हमे
कितना चलना शेष है?
बस आज की बात इसी प्रश्न के साथ समाप्त ........ आशा है कि मेरी
बात पर आप गौर फरमाएंगे.......................
आपका अभय
मकर संक्रांति का इतिहास और संक्राति का आपकी राशि पर प्रभाव
हिंदुओं में मकर संक्रांति का त्योहार बहुत धुमधाम से मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति परंपरागत रूप से 14 जनवरी को मनाई जाती आ रही है लेकिन 2012 से मकर संक्रांति की तिथि को लेकर उलझन की स्थिति बनती चली आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में मकर संक्रांति 14 को मनाई जाएगी या 15 जनवरी को इस बात को लेकर सवाल सामने आने लगे हैं।
किया जाता है दान
सूर्य का धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति कहलाता है। इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में यह समय देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा जाता है। मकर संक्राति सूर्य के उत्तरायण होने से गरम मौसम की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर लौटता है। इसलिए भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद पूजन करके घी, तिल, कंबल और खिचड़ी का दान किया जाता है।
सूर्य का धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति कहलाता है। इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में यह समय देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि कहा जाता है। मकर संक्राति सूर्य के उत्तरायण होने से गरम मौसम की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर लौटता है। इसलिए भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद पूजन करके घी, तिल, कंबल और खिचड़ी का दान किया जाता है।
मकर संक्रांति का इतिहास
श्रीमद्भागवत एवं देवी पुराण के मुताबिक, शनि महाराज का अपने पिता से वैर भाव था क्योंकि सूर्य देव ने उनकी माता छाया को अपनी दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र यमराज से भेद-भाव करते देख लिया था, इस बात से नाराज होकर सूर्य देव ने संज्ञा और उनके पुत्र शनि को अपने से अलग कर दिया था। इससे शनि और छाया ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का शाप दे दिया था।
श्रीमद्भागवत एवं देवी पुराण के मुताबिक, शनि महाराज का अपने पिता से वैर भाव था क्योंकि सूर्य देव ने उनकी माता छाया को अपनी दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र यमराज से भेद-भाव करते देख लिया था, इस बात से नाराज होकर सूर्य देव ने संज्ञा और उनके पुत्र शनि को अपने से अलग कर दिया था। इससे शनि और छाया ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का शाप दे दिया था।
यमराज ने की थी तपस्या
पिता सूर्यदेव को कुष्ट रोग से पीड़ित देखकर यमराज काफी दुखी हुए। यमराज ने सूर्यदेव को कुष्ठ रोग से मुक्त करवाने के लिए तपस्या की। लेकिन सूर्य ने क्रोधित होकर शनि महाराज के घर कुंभ जिसे शनि की राशि कहा जाता है उसे जला दिया। इससे शनि और उनकी माता छाया को कष्ठ भोगना पड़ रहा था। यमराज ने अपनी सौतली माता और भाई शनि को कष्ट में देखकर उनके कल्याण के लिए पिता सूर्य को काफी समझाया। तब जाकर सूर्य देव शनि के घर कुंभ में पहुंचे।
पिता सूर्यदेव को कुष्ट रोग से पीड़ित देखकर यमराज काफी दुखी हुए। यमराज ने सूर्यदेव को कुष्ठ रोग से मुक्त करवाने के लिए तपस्या की। लेकिन सूर्य ने क्रोधित होकर शनि महाराज के घर कुंभ जिसे शनि की राशि कहा जाता है उसे जला दिया। इससे शनि और उनकी माता छाया को कष्ठ भोगना पड़ रहा था। यमराज ने अपनी सौतली माता और भाई शनि को कष्ट में देखकर उनके कल्याण के लिए पिता सूर्य को काफी समझाया। तब जाकर सूर्य देव शनि के घर कुंभ में पहुंचे।
मकर में हुआ सूर्य का प्रवेश
कुंभ राशि में सब कुछ जला हुआ था। उस समय शनि देव के पास तिल के अलावा कुछ नहीं था इसलिए उन्होंने काले तिल से सूर्य देव की पूजा की। शनि की पूजा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि को आशीर्वाद दिया कि शनि का दूसरा घर मकर राशि मेरे आने पर धन धान्य से भर जाएगा। तिल के कारण ही शनि को उनका वैभव फिर से प्राप्त हुआ था इसलिए शनि देव को तिल प्रिय है। इसी समय से मकर संक्राति पर तिल से सूर्य एवं शनि की पूजा का नियम शुरू हुआ।
कुंभ राशि में सब कुछ जला हुआ था। उस समय शनि देव के पास तिल के अलावा कुछ नहीं था इसलिए उन्होंने काले तिल से सूर्य देव की पूजा की। शनि की पूजा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि को आशीर्वाद दिया कि शनि का दूसरा घर मकर राशि मेरे आने पर धन धान्य से भर जाएगा। तिल के कारण ही शनि को उनका वैभव फिर से प्राप्त हुआ था इसलिए शनि देव को तिल प्रिय है। इसी समय से मकर संक्राति पर तिल से सूर्य एवं शनि की पूजा का नियम शुरू हुआ।
काले तिल से की पूजा
शनि देव की पूजा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि महाराज को आशीर्वाद दिया कि जो भी व्यक्ति मकर संक्राति के दिन काले तिल से सूर्य की पूजा करेगा उसके सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे। इस दिन तिल से सूर्य पूजा करने पर आरोग्य सुख में वृद्धि होती है। शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं तथा आर्थिक उन्नति होती है। तिल का भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करना चाहिए।
शनि देव की पूजा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि महाराज को आशीर्वाद दिया कि जो भी व्यक्ति मकर संक्राति के दिन काले तिल से सूर्य की पूजा करेगा उसके सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे। इस दिन तिल से सूर्य पूजा करने पर आरोग्य सुख में वृद्धि होती है। शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं तथा आर्थिक उन्नति होती है। तिल का भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करना चाहिए।
भीष्म पितामाह ने चुना था आज का दिन
मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान 100 गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कंबल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।
मान्यता है कि इस अवसर पर दिया गया दान 100 गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कंबल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।
14 जनवरी से सूर्य आएंगे पुत्र शनि के घर, जानिए क्या होगा आप पर असर
ज्योतिष शास्त्र की गोचर गणनानुसार 14 जनवरी 2019, सोमवार से सूर्य सायं 7 बजकर 45 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर राशि में सूर्य शत्रुक्षेत्री होंगे, क्योंकि ज्योतिषीय ग्रहमैत्री के अनुसार सूर्य व शनि नैसर्गिक रूप से शत्रु माने जाते हैं। सूर्य का शत्रु राशि मकर में प्रवेश समस्त 12 राशियों को भी प्रभावित करेगा।
आइए जानते हैं सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
1. मेष- मेष राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार व्यापार में लाभ प्राप्त होगा। कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। धनलाभ होगा। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। शासन से सहयोग प्राप्त होगा। राजनीति से जुड़े व्यक्तियों को लाभ होगा।
2. वृषभ- वृषभ राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार धनहानि की आशंका है। झूठे आरोप के कारण प्रतिष्ठा धूमिल होगी। कार्यों में असफलता प्राप्त होगी। रोग के कारण कष्ट होगा। पारिवारिक विवाद के कारण अशांति का वातावरण रहेगा।
3. मिथुन- मिथुन राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार विवाद के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट-कचहरी व मुकदमे में असफलता के योग हैं। धन का अपव्यय होगा। उच्च रक्तचाप के कारण कष्ट होगा। मान-प्रतिष्ठा में कमी आएगी।
4. कर्क- कर्क राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार दांपत्य सुख में हानि होगी। कार्यों में असफलता प्राप्त होगी। धनहानि एवं मानहानि होगी। सिर में पीड़ा के साथ-साथ शारीरिक कष्ट की आशंकाएं हैं।
5. सिंह- सिंह राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। रोगों से मुक्ति मिलेगी। राज्य से लाभ प्राप्त होगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
6. कन्या- कन्या राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार मानसिक पीड़ा होगी। राज्याधिकारियों से विवाद होगा। संतान को कष्ट की आशंका है। धनहानि होगी। यात्रा में दुर्घटना की संभावना है।
7. तुला- तुला राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार पारिवारिक विवाद के कारण कष्ट होगा। धनहानि व मानहानि होगी। यात्रा में कष्ट होगा। जमीन-जायदाद संबंधी मामलों में असफलता प्राप्त होगी। मानसिक अशांति के कारण कष्ट रहेगा।
8. वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार मित्रों से लाभ होगा। धनलाभ होगा। राज्याधिकारियों से अनुकूलता प्राप्त होगी। पदोन्नति की संभावना है। उच्च पद की प्राप्ति होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
9. धनु- धनु राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार व्यापार व धन-संपत्ति में हानि का योग है। मित्रों व परिवारजनों से विवाद की आशंका है। सिर व आंखों में पीड़ा के कारण परेशानी रहेगी।
10. मकर- मकर राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार धनहानि के योग हैं। सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी होगी। राज्याधिकारियों से विवाद होगा। आंखों में पीड़ा के कारण कष्ट होगा।
11. कुंभ- कुंभ राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार स्थान परिवर्तन का योग बन रहा है। कार्यक्षेत्र में परेशानियां रहेंगी। गुप्त शत्रुओं के कारण हानि का योग है।
12. मीन- मीन राशि वाले जातकों को सूर्य के गोचर अनुसार धन प्राप्ति का योग है। पदोन्नति के अवसर हैं। मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। शासकीय कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। पदोन्नति के योग बनेंगे।
सूर्य के अशुभ प्रभाव की शांति हेतु उपयोगी उपाय-
-250 ग्राम गुड़ रविवार को बहते जल में प्रवाहित करें।
-प्रतिदिन कुमकुम मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
-प्रति रविवार 8 बादाम मंदिर में चढ़ाएं।
-प्रति रविवार सूर्यास्त से पूर्व बिना नमक वाला भोजन करें।
-सवत्सा लाल गाय का दान करें।
-लाल वस्त्र न पहनें।
नारद का मोह और श्री कृष्ण का तुला दान
एक बार देवर्षि नारद के मन में आया कि भगवान् के पास बहुत महल आदि है है, एक- आध हमको भी दे दें तो यहीं आराम से टिक जायें, नहीं तो इधर-उधर घूमते रहना पड़ता है। भगवान् के द्वारिका में बहुत महल थे।
नारद जी ने भगवान् से कहा- भगवन ! आपके बहुत महल हैं, एक हमको दो तो हम भी आराम से रहें। आपके यहाँ खाने- पीने का इंतजाम अच्छा ही है । भगवान् ने सोचा कि यह मेरा भक्त है, विरक्त संन्यासी है। अगर यह कहीं राजसी ठाठ में रहने लगा तो थोड़े दिन में ही इसकी सारी विरक्ति भक्ति निकल जायेगी।
हम अगर सीधा ना करेंगे तो यह बुरा मान जायेगा, लड़ाई झगड़ा करेगा कि इतने महल हैं और एकमहल नहीं दे रहे हैं। भगवान् ने चतुराई से काम लिया, नारद से कहा जाकर देख ले, जिस मकान में जगह खाली मिले वही तेरे नाम कर देंगे।
नारद जी वहाँ चले। भगवान् की तो १६१०८ रानियाँ और प्रत्येक के ११- ११ बच्चे भी थे। यह द्वापर युग की बात है।
सब जगह नारद जी घूम आये लेकिन कहीं एक कमरा भी खाली नहीं मिला, सब भरे हुए थे। आकर भगवान् से कहा वहाँ कोई जगह खाली नहीं मिली। भगवान् ने कहा फिर क्या करूँ , होता तो तेरे को दे देता। नारद जी के मन में आया कि यह तो भगवान् ने मेरे साथ धोखाधड़ी की है, नहीं तो कुछ न कुछ करके, किसी को इधर उधर शिफ्ट कराकर, खिसकाकर एक कमरा तो दे ही सकते थे।
इन्होंने मेरे साथ धोखा किया है तो अब मैं भी इन्हे मजा चखाकर छोडूँगा। नारद जी रुक्मिणी जी के पास पहुँचे, रुक्मिणी जी ने नारद जी की आवभगत की, बड़े प्रेम से रखा। उन दिनों भगवान् सत्यभामा जी के यहाँ रहते थे।
एक आध दिन बीता तो नारद जी ने उनको दान की कथा सुनाई, सुनाने वाले स्वयं नारद जी। दान का महत्त्व सुनाने लगे कि जिस चीज का दान करोगे वही चीज आगे तुम्हारे को मिलती है। जब नारद जी ने देखा कि यह बात रुक्मिणी जी को जम गई है तो उनसे पूछा आपको सबसे ज्यादा प्यार किससे है ?
रुक्मिणी जी ने कहा यह भी कोई पूछने की बात है, भगवान् हरि से ही मेरा प्यार है। कहने लगे फिर आपकी यही इच्छा होगी कि अगले जन्म में तुम्हें वे ही मिलें।
रुक्मिणी जी बोली इच्छा तो यही है। नारद जी ने कहा इच्छा है तो फिर दान करदो, नहीं तो नहीं मिलेंगे। आपकी सौतें भी बहुत है और उनमें से किसी ने पहले दान कर दिया उन्हें मिल जायेंगे। इसलिये दूसरे करें, इसके पहले आप ही कर दे। रुक्मिणी जी को बात जँच गई कि जन्म जन्म में भगवान् मिले तो दान कर देना चाहियें।
रुक्मिणी से नारद जी ने संकल्प करा लिया। अब क्या था, नारद जी का काम बन गया। वहाँ से सीधे सत्यभामा जी के महल में पहुँच गये और भगवान् से कहा कि उठाओ कमण्डलु, और चलो मेरे साथ। भगवान् ने कहा कहाँ चलना है, बात क्या हुई ? नारद जी ने कहा बात कुछ नहीं, आपको मैंने दान में ले लिया है। आपने एक कोठरी भी नहीं दी तो मैं अब आपको भी बाबा बनाकर पेड़ के नीचे सुलाउँगा। सारी बात कह सुनाई।
भगवान् ने कहा रुक्मिणी ने दान कर दिया है तो ठीक है। वह पटरानी है, उससे मिल तो आयें। भगवान् ने अपने सारे गहने गाँठे, रेशम के कपड़े सब खोलकर सत्यभामा जी को दे दिये और बल्कल वस्त्र पहनकर, भस्मी लगाकर और कमण्डलु लेकर वहाँ से चल दिये।
उन्हें देखते ही रुक्मिणी के होश उड़ गये। पूछा हुआ क्या ? भगवान् ने कहा पता नहीं, नारद कहता है कि तूने मेरे को दान में दे दिया। रुक्मिणी ने कहा लेकिन वे कपड़े, गहने कहाँ गये, उत्तम केसर को छोड़कर यह भस्मी क्यों लगा ली ? भगवान् ने कहा जब दान दे दिया तो अब मैं उसका हो गया। इसलिये अब वे ठाठबाट नहीं चलेंगे।
अब तो अपने भी बाबा जी होकर जा रहे हैं । रुक्मिणी ने कहा मैंने इसलिये थोड़े ही दिया था कि ये ले जायें।
भगवान् ने कहा और काहे के लिये दान दिया जाता है ? इसीलिये दिया जाता है कि जिसको दो वह ले जाये । अब रुक्मिणी को होश आया कि यह तो गड़बड़ मामला हो गया। रुक्मिणी ने कहा नारद जी यह आपने मेरे से पहले नहीं कहा, अगले जन्म में तो मिलेंगे सो मिलेंगे, अब तो हाथ से ही खो रहे हैं । नारद जी ने कहा अब तो जो हो गया सो हो गया, अब मैं ले जाऊँगा। रुक्मिणी जी बहुत रोने लगी।
तब तक हल्ला गुल्ला मचा तो और सब रानियाँ भी वहा इकठ्ठी हो गई। सत्यभामा, जाम्बवती सब समझदार थीं। उन्होंने कहा भगवान् एक रुक्मिणी के पति थोड़े ही हैं, इसलिये रुक्मिणी को सर्वथा दान करने का अधिकार नहीं हो सकता, हम लोगों का भी अधिकार है।
नारद जी ने सोचा यह तो घपला हो गया। कहने लगे क्या भगवान् के टुकड़े कराओगे ? तब तो 16108 हिस्से होंगे। रानियों ने कहा नारद जी कुछ ढंग की बात करो। नारद जी ने विचार किया कि अपने को तो महल ही चाहिये था और यही यह दे नहीं रहे थे, अब मौका ठीक है, समझौते पर बात आ रही है।
नारद जी ने कहा भगवान् का जितना वजन है, उतने का तुला दान कर देने से भी दान मान लिया जाता है ।
तुलादान से देह का दान माना जाता है। इसलिये भगवान् के वजन का सोना, हीरा, पन्ना दे दो। इस पर सब रानियाँ राजी हो गई। बाकी तो सब राजी हो गये लेकिन भगवान् ने सोचा कि यह फिर मोह में पड़ रहा है । इसका महल का शौक नहीं गया। भगवान् ने कहा तुलादान कर देना चाहिये, यह बात तो ठीक हे ।
भगवान् तराजु के एक पलड़े के अन्दर बैठ गये। दूसरे पलड़े में सारे गहने, हीरे, पन्ने रखे जाने लगे। लेकिन जो ब्रह्माण्ड को पेट में लेकर बैठा हो, उसे द्वारिका के धन से कहाँ पूरा होना है। सारा का सारा धन दूसरे पलड़े पर रख दिया लेकिन जिस पलड़े पर भगवान बैठे थे वह वैसा का वैसा नीचे लगा रहा, ऊपर नहीं हुआ ।
नारद जी ने कहा देख लो, तुला तो बराबर हो नहीं रहा है, अब मैं भगवान् को ले जाऊँगा । सब कहने लगे अरे कोई उपाय बताओ । नारद जी ने कहा और कोई उपाय नहीं है । अन्य सब लोगों ने भी अपने अपने हीरे पन्ने लाकर डाल दिये लेकिन उनसे क्या होना था । वे तो त्रिलोकी का भार लेकर बैठे थे। नारद जी ने सोचा अपने को अच्छा चेला मिल गया, बढ़िया काम हो गया । उधर औरते सब चीख रही थी। नारद जी प्रसन्नता के मारे इधर ऊधर टहलने लगे।
भगवान् ने धीरे से रुक्मिणी को बुलाया। रुक्मिणी ने कहा कुछ तो ढंग निकालिये, आप इतना भार लेकर बैठ गये, हम लोगों का क्या हाल होगा ? भगवान् ने कहा ये सब हीरे पन्ने निकाल लो, नहीं तो बाबा जी मान नहीं रहे हैं।
यह सब निकालकर तुलसी का एक पत्ता और सोने का एक छोटा सा टुकड़ा रख दो तो तुम लोगों का काम हो जायगा। रुक्मिणी ने सबसे कहा कि यह नहीं हो रहा है तो सब सामान हटाओ । सारा सामान हटा दिया गया और एक छोटे से सोने के पतरे पर तुलसी का पता रखा गया तो भगवान् के वजन के बराबर हो गया ।
सबने नारद जी से कहा ले जाओ तूला दान। नारद जी ने खुब हिलाडुलाकर देखा कि कहीं कोई डण्डी तो नहीं मार रहा है । नारद जी ने कहा इन्होंने फिर धोखा दिया । फिर जहाँ के तहाँ यह लेकर क्या करूँगा ? उन्होंने कहा भगवन्। यह आप अच्छा नहीं कर रहे हैं, केवल घरवालियों की बात सुनते हैं, मेरी तरफ देखो।
भगवान् ने कहा तेरी तरफ क्या देखूँ ? तू सारे संसार के स्वरूप को समझ कर फिर मोह के रास्ते जाना चाह रहा है तो तेरी क्या बात सुनूँ। तब नारद जी ने समझ लिया कि भगवान् ने जो किया सो ठीक किया । नारद जी ने कहा एक बात मेरी मान लो। आपने मेरे को तरह तरह के नाच अनादि काल से नचाये और मैंने तरह तरह के खेल आपको दिखाये।
कभी मनुष्य, कभी गाय इत्यादि पशु, कभी इन्द्र, वरुण आदि संसार में कोई ऐसा स्वरूप नहीं जो चैरासी के चक्कर में किसी न किसी समय में हर प्राणी ने नहीं भोग लिया। अनादि काल से यह चक्कर चल रहा है, सब तरह से आपको खेल दिखाया आप मेरे को ले जाते रहे और मैं खेल करता रहा ।
अगर आपको मेरा कोई खेल पसंद आगया हो तो आप राजा की जगह पर हैं और मैं ब्राह्मण हूँ तो मेरे को कुछ इनाम देना चाहिये । वह इनाम यही चाहता हूँ कि मेरे शोक मोह की भावना निवृत्त होकर मैं आपके परम धाम में पहुँच जाऊँ ।
और यदि कहो कि तूने जितने खेल किये सब बेकार है, तो भी आप राजा हैं । जब कोई बार बार खराब खेल करता है तो राजा हुक्म देता है कि इसे निकाल दो । इसी प्रकार यदि मेरा खेल आपको पसन्द नहीं आया है तो फिर आप कहो कि इसको कभी संसार की नृत्यशाला में नहीं लाना है । तो भी मेरी मुक्ति है । भगवान् बड़े प्रसन्न होकर तराजू से उठे और नारद जी को छाती से लगाया और कहा तेरी मुक्ति तो निश्चित है।
कौन होगा प्रधान मंत्री 2019
ज्योतिषियों के अनुसार कौन बनेगा देश का प्रधानमंत्री न 2019 में
ज्योतिषियों ने कर दी भविष्यवाणी, 2019 में यह बनेंगे देश के प्रधानमंत्री।
वाराणसी. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी के प्रसिद्द ज्योतिषाचार्य पं.ऋषि द्विवेदी ने 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर महतत्वपूर्ण जानकारी दी है। ज्योतिषार्चाय ने यह जानकारी पीएम मोदी और बीजेपी की कुंडली को देखने के बाद दी है।
दरअसल, बीजेपी अपने कर्यकाल के सबस खराब समय से गुजर रही है। बीजेपी पर बड़े आरोप लग रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकर इस समय कमजोर लग रही है। जिसका फायदा विपक्ष उठा सकता है। ऐसे में आने वाले चुनाव में पार्टी को नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है।
ज्योतिषाचार्य ने यह जानकार दी कि, 2019 लोकसभा चुनाव में किसकी सरकार बन सकती है और कौन मुंह के बल गिर सकता है। ऐसा पं.ऋषि द्विवेदी ने पीएम मोदी औऱ पार्टी दोनों की कुंडली मिलाकर गणना करने के बाद बताया।
कुंडली के अध्ययन के अनुसार, बीजेपी की जन्म 6 अप्रैल 1980 में हुआ है। इसके तहत बीजेपी की कुंडली बनायी जाए तो मिथुन लग्र वृश्चिम राशि की कुंडली है। बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2012 से सूर्य की महादशा आरंभ हुई है। सूर्य की महादशा में बीजेपी को लाभ होना शुरू हुआ। इसके बाद ही बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का प्रत्याशी बनाया गया। उस समय पीएम मोदी की कुंडली में अच्छा समय था। जिसकी वजह से बीजेपी और पीएम मोदी की कुंडली दोनों के ग्रह योग के चलने के साथ ही पहली बार केंद्र में बहुमत की सरकार बनी।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, सूर्य की महादशा छह: साल के लिए होती है। जिसके चलते बीजेपी ने कई राज्यों में चुनाव जीता। पर अब बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2017 से सूर्य की महादशा में शुक्र की महादशा आ गई। इसका फल अच्छा नहीं होता है। इसी कारण बीजेपी का खराब समय शुरू हो गया है। बीजेपी पर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं। खास बात है कि, यह समय 10 साल के लिए है। जिसकी वजह से बीजेपी को भविष्य में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यानी 2019 में बीजेपी के अच्छे दिन नहीं है।
क्या कहती है पीएम मोदी की कुंडली-
अब बात की जी रही है पीएम मोदी की कुंडली की। पीएम मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न वृश्चिक राशि की है। साथ ही पीएम मोदी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा चल रही है। जो वर्ष 2021 तक चलेगी। पीएम मोदी की कुंडली में चन्द्रमा की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है, यह स्थिति 3 मार्च 2019 तक रहेगी। इसके ठीक बाद कुंडली में केतु का अतर आयेगा। पीएम मोदी के लिए केतु भाग्य बदलने वाला साबित हो सकता है। पीएम मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न की है और इस लगन में केतु लाभकारी होता है। इसके अतिरिक्त वृश्चिक लग्र के लिए बृहस्पति पंचमेश में होता है। यह स्थिति बहुत अच्छी मानी गई है। तो बता दें कि, मार्च के शुरूआत से ही पीएम मोदी का फिर से अच्छे दिन वाले हैं। यानी अच्छा समय शुरू हो जाएगा। जिसका फायदा पीएम मोदी को 2019 चुनाव में होगा और एक बार पीएम नरेन्द्र मोदी के चलते बीजेपी को बहुमत या फिर सबसे अधिक सीट मिल सकती है।
पीएम मोदी के कारण ही बीजेपी को लाभ होगा। तो यहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने का दावा तो नहीं कर सकते, लेकिन ज्योतिषाचार्य ने इतनी भविष्यवाणी की है कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और फिर से देश की सत्ता पीएम मोदी के हाथों में होगी।
ज्योतिषियों ने कर दी भविष्यवाणी, 2019 में यह बनेंगे देश के प्रधानमंत्री।
वाराणसी. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी के प्रसिद्द ज्योतिषाचार्य पं.ऋषि द्विवेदी ने 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर महतत्वपूर्ण जानकारी दी है। ज्योतिषार्चाय ने यह जानकारी पीएम मोदी और बीजेपी की कुंडली को देखने के बाद दी है।
दरअसल, बीजेपी अपने कर्यकाल के सबस खराब समय से गुजर रही है। बीजेपी पर बड़े आरोप लग रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकर इस समय कमजोर लग रही है। जिसका फायदा विपक्ष उठा सकता है। ऐसे में आने वाले चुनाव में पार्टी को नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है।
ज्योतिषाचार्य ने यह जानकार दी कि, 2019 लोकसभा चुनाव में किसकी सरकार बन सकती है और कौन मुंह के बल गिर सकता है। ऐसा पं.ऋषि द्विवेदी ने पीएम मोदी औऱ पार्टी दोनों की कुंडली मिलाकर गणना करने के बाद बताया।
कुंडली के अध्ययन के अनुसार, बीजेपी की जन्म 6 अप्रैल 1980 में हुआ है। इसके तहत बीजेपी की कुंडली बनायी जाए तो मिथुन लग्र वृश्चिम राशि की कुंडली है। बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2012 से सूर्य की महादशा आरंभ हुई है। सूर्य की महादशा में बीजेपी को लाभ होना शुरू हुआ। इसके बाद ही बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी को पीएम पद का प्रत्याशी बनाया गया। उस समय पीएम मोदी की कुंडली में अच्छा समय था। जिसकी वजह से बीजेपी और पीएम मोदी की कुंडली दोनों के ग्रह योग के चलने के साथ ही पहली बार केंद्र में बहुमत की सरकार बनी।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, सूर्य की महादशा छह: साल के लिए होती है। जिसके चलते बीजेपी ने कई राज्यों में चुनाव जीता। पर अब बीजेपी की कुंडली में अक्टूबर 2017 से सूर्य की महादशा में शुक्र की महादशा आ गई। इसका फल अच्छा नहीं होता है। इसी कारण बीजेपी का खराब समय शुरू हो गया है। बीजेपी पर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं। खास बात है कि, यह समय 10 साल के लिए है। जिसकी वजह से बीजेपी को भविष्य में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यानी 2019 में बीजेपी के अच्छे दिन नहीं है।
क्या कहती है पीएम मोदी की कुंडली-
अब बात की जी रही है पीएम मोदी की कुंडली की। पीएम मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न वृश्चिक राशि की है। साथ ही पीएम मोदी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा चल रही है। जो वर्ष 2021 तक चलेगी। पीएम मोदी की कुंडली में चन्द्रमा की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है, यह स्थिति 3 मार्च 2019 तक रहेगी। इसके ठीक बाद कुंडली में केतु का अतर आयेगा। पीएम मोदी के लिए केतु भाग्य बदलने वाला साबित हो सकता है। पीएम मोदी की कुंडली वृश्चिक लग्न की है और इस लगन में केतु लाभकारी होता है। इसके अतिरिक्त वृश्चिक लग्र के लिए बृहस्पति पंचमेश में होता है। यह स्थिति बहुत अच्छी मानी गई है। तो बता दें कि, मार्च के शुरूआत से ही पीएम मोदी का फिर से अच्छे दिन वाले हैं। यानी अच्छा समय शुरू हो जाएगा। जिसका फायदा पीएम मोदी को 2019 चुनाव में होगा और एक बार पीएम नरेन्द्र मोदी के चलते बीजेपी को बहुमत या फिर सबसे अधिक सीट मिल सकती है।
पीएम मोदी के कारण ही बीजेपी को लाभ होगा। तो यहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने का दावा तो नहीं कर सकते, लेकिन ज्योतिषाचार्य ने इतनी भविष्यवाणी की है कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और फिर से देश की सत्ता पीएम मोदी के हाथों में होगी।
पुणे की वैज्ञानिक ने यादव रसोइये के ऊपर केस दर्ज कराया क्योंकि उसके बने खाने से उसका धर्म भृष्ट हुआ।
"पुणे में मौसम विभाग की वैज्ञानिक मेधा विनायक खोले को जब ये पता चला कि उनके यहां खाना बनाने वाली ब्राह्मण नहीं है तो वह सन्न रह गई। वैज्ञानिक ने इसके बाद अपनी 60 वर्षीय नौकरानी के खिलाफ धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है क्यों इससे उसके देवता अपवित्र हो गए …इसे अपना अपमान समझ निर्मला यादव ने पलटकर थाने में मेधा के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। "-- दिलीप मंडल की फेस बुक वाल से
जातिवादी मानसिकता से ग्रसित लोग सामाजिक असमानता दूर करने के नाम पर कितना भी दलितों के घर खाना खाने का दिखावा कर लें। शिक्षा और पद भी इनकी मानसिकता नहीं बदल पाते। आरक्षण के मुद्दे पर सवर्ण ज्ञान देते हैं कि अब तो देश में समानता आ गई है, अब आरक्षण की कोई जरुरत नहीं। जमीनी हकीकत इस दिखावे से बहुत अलग है।
आप सोच भी नहीं सकते कि आजादी के इतने साल बाद भी आप किस तरह की मानसिकता वालों के देश में रह रहे हैं। जातिवाद की घटिया मानसिकता से उपजा जाति का दंश क्या होता है, यह पुणे में एक ब्राह्मण वैज्ञानिक के यहां खाना बनाने वाली से बेहतर कौन जान सकता है ?
पुणे में मौसम विभाग की वैज्ञानिक मेधा विनायक खोले को जब ये पता चला कि उनके यहां खाना बनाने वाली ब्राह्मण नहीं है तो वह सन्न रह गई। वैज्ञानिक ने इसके बाद अपनी 60 वर्षीय नौकरानी के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला दर्ज करा दिया।
पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में वैज्ञानिक डॉ. मेधा विनायक खोले ने उनके घर में कार्यरत खाना बनाने वाली 60 वर्षीय निर्मला यादव पर धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है.
मेधा के अनुसार, उन्हें अपने घर में गौरी गणपति और श्राद्ध का भोजन बनने के लिए हर साल ब्राह्मण और सुहागिन महिला की ज़रूरत होती है. मेधा पुणे के मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात है.
क्या गंगा-यमुना का पानी लोगों को कायर बनाता है?
योगी आदित्यनाथ ने जब अखिलेश यादव के हटने के बाद मुख्यमंत्री निवास का गोबर और गंगाजल से शुद्धिकरण कराया, तो अखिलेश विरोध में एक शब्द नहीं बोल पाए. यह कहकर रह गए कि – दोबारा सीएम बनने
पर मैं भी शुद्धिकरण कराऊंगा।
वहीं महाराष्ट्र की निर्मला यादव को जब ब्राह्मण साइंटिस्ट मेधा खोले ने जाति के आधार पर अपमानित किया, तो निर्मला पलटकर आईं और थाने पहुंचकर मेधा के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी।
न दैन्यम, न पलायनम!!
निर्मला की जवाबी शिकायत के बाद मेधा के हाथपांव फूल गए और घबराकर उन्होंने निर्मला यादव के खिलाफ अपनी FIR वापस ले ली.
सामाजिक समता की लड़ाई विंध्याचल पर्वत के दक्षिण में ही मजबूती से लड़ी जा रही है.
निर्मला यादव का जोखिम समझिए. अब उसे पुणे शहर के किसी संभ्रांत घर में काम नहीं मिलेगा. लेकिन उन्होंने अपमान सहने से इनकार करने का साहस दिखाया. थाने चली गईं. यही इंसान के लक्षण हैं. गुस्सा आना चाहिए.
इस खबर से यह साबित होता है कि आज भी भारतीय सवर्ण समाज मे जातिवाद ,छुआछूत और भेदभाव भयंकर रूप में हावी है तथा चाहे कोई वैज्ञानिक ही क्यों न हो ,उसकी मानसिकता उतनी ही दूषित ,मैली ,कूपमण्डूक और अवैज्ञानिक ही बनी रहती है|दुःख की बात है कि आज भी एक मराठा नौकरानी को छद्म ब्राह्मणी बनकर रसोइये की नौकरी करनी पड़ती है और पकड़े जाने पर मुकदमा झेलना पड़ता है ,शर्म आती है ऐसी जातिवादी सोच की वैज्ञानिक पर और उस व्यवस्था पर जो ऐसे हास्यास्पद मामलों में मुकदमे दर्ज कर लेती है और उनकी जांच भी करती है ,दलितों के खिलाफ निकलने वाले मराठा मोर्चे इस अपमानजनक घटना पर मूक बने रहते है.
जाति छिपाने का आरोप नकारते हुए महिला रसोइए ने भी मौसम विभाग की वैज्ञानिक के ख़िलाफ़ केस किया।
पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में वैज्ञानिक डॉ. मेधा विनायक खोले ने उनके घर में कार्यरत खाना बनाने वाली 60 वर्षीय निर्मला यादव पर धोखाधड़ी और धार्मिक भावना को आहत करने का केस दर्ज किया है।
मेधा के अनुसार, उन्हें अपने घर में गौरी गणपति और श्राद्ध का भोजन बनने के लिए हर साल ब्राह्मण और सुहागिन महिला की ज़रूरत होती है। मेधा पुणे के मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात है।
एनडीटीवी इंडिया की ख़बर के अनुसार, मेधा का आरोप है कि साल 2016 में निर्मला ने ख़ुद को ब्राह्मण और सुहागिन बताकर ये नौकरी ली और उस समय उन्होंने अपना नाम निर्मला कुलकर्णी बताया था जबकि वह दूसरी जाति से हैं। डॉ. मेधा के मुताबिक इस साल 6 सितंबर को उनके गुरुजी ने बताया कि निर्मला ब्राह्मण नहीं हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, मेधा निर्मला की जाति जानने के लिए धयारी स्थित उनके घर तक गई और निर्मला के ब्राह्मण और सुहागिन न होने की बात मालूम पड़ने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत करने का फैसला लिया।
एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मेधा ने पुणे के सिंहगढ़ रोड पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है. पुलिस ने निर्मला यादव के खिलाफ धारा 419 (पहचान छुपा कर धोखा देने), 352 (हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 504 (शांति का उल्लंघन करने के इरादे से एक व्यक्ति का अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया है।
दूसरी तरफ निर्मला का कहना है कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है। परिवार चलाने के लिए उन्हें यह झूठ बोलना पड़ा.
मेधा का कहना है कि निर्मला से पूछताछ करने पर निर्मला ने कहा कि आर्थिक समस्या होने के कारण उन्होंने ऐसा किया साथ ही निर्मला ने उन्हें गुस्से में गाली दी और मारने झपटीं. मेधा का कहना है कि उन्हें 15 से 20 हज़ार तक आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
पुणे ब्राह्मण महासंघ ने इसे मालकिन और नौकरानी के बीच का विवाद बताते हुए कहा है कि इस मामले को जाति की दृष्टि से नहीं देखकर किसी की व्यक्तिगत भावना आहत होने के नज़रिये से देखना चाहिए. इस बीच राष्ट्रवादी युवती कांग्रेस ने डॉ. मेधा खोले के घर के सामने विरोध प्रदर्शन किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, निर्मला यादव ने इन सभी आरोपों को ख़ारिज किया है. निर्मला कहती हैं, ‘मैं कभी डॉ. मेधा के पास नौकरी के लिए नहीं गई वो ख़ुद यहां आई थीं और न ही मैंने कभी अपनी जाति छुपाई. मैंने उनके घर तीन उत्सवों पर खाना बनाया पर उन्होंने अभी तक कोई पैसे नहीं दिए. जब मैंने पैसे मांगे तो उन्होंने मुझे आठ हज़ार रुपये कुछ दिन में देने का वादा किया. मैंने उनकी बात पर विश्वास कर लिया क्योंकि वो बड़ी अधिकारी हैं. मैंने कभी नहीं छुपाया की मैं मराठा समुदाय से हूं और एक विधवा हूं।'
‘बीते 6 सितंबर को मेधा मेरे घर आईं और मुझ पर जाति छुपाने का आरोप लगाया. उन्होंने ये तक कहा कि मेरे कारण उनके भगवान अपवित्र हो गए हैं. उनकी शिकायत के बाद मैंने भी उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है।’
पुलिस के अनुसार डॉ. मेधा के ख़िलाफ़ धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचना), 506(आपराधिक धमकी देना) और 584 (जानबूछ का अपमान करना) के ठत एक ग़ैर-संज्ञेय अपराध दर्ज किया है।
निर्मला यादव के दामाद तुषार काकडे जो कि शिवसंग्राम संगठन के पदाधिकारी हैं साथ ही मराठा आंदोलन में एक सक्रिय सहभागी भी कहते हैं, ‘हम डॉ. खोले की कड़ी निंदा करते हैं जो कि एक वैज्ञानिक होते हुए भी कहती हैं कि उनकी भावना एक दूसरी जाति की विधवा महिला के हाथ से खाना बनवाने के कारण आहत हो गई है।'
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति और सांभाजी ब्रिगेड ने भी प्रेस रिलीज़ निकालते हुए इस घटना की निंदा की और इसे क़ानून का उल्लंघन बताया।
सवाल ये है कि हमारे उत्तर प्रदेश में ऐसी बहुत सी विनायक खोले है, शायद हमें रोज ही दो चार होना पड़ता हो इन लोगों से , तो हम स्वयं सोचे कि हम किस राह जा रहे हैं??????
एक कविता जो हमेशा हौसला देगी
एक कविता जो हमेशा हौसला देगी / Inspirational Poem
दोस्तों Poems में अद्भुत शक्ति होती है। जो काम एक Book नहीं करती वह काम महज एक कविता कर देती है। यूं तो हिन्दी साहित्य (Hindi Literature) काफी समृद्ध है, उसकी परम्परा, रीति, सौंदर्य, शास्त्र बहुत पुराना है।
आपके लिए एक ऐसी कविता लाया हूं जो हमेशा हौसला देगी, जो मुर्दे में भी जान डालने वाली ताकत रखती है।
इसकी हर एक पंक्ति, हर एक शब्द और उसके पीछें छुपे भाव को एक बार मन में सोचे तो आप पाएंगे कि कविता को पढने से पहले आप कुछ और थे और बाद में कुछ और।
यह कविता सदी के महानतम कवियों में से एक पद्म भूषण श्री गोपालदास नीरज की कविता है।
नाम - गोपाल दास ‘नीरज‘
जन्मकाल- 4 जनवरी 1925 से अब तक (जीवित)
ग्राम- पुरावली, इटावा, उत्तरप्रदेश।
विशेष- गत 50 वर्षों से काव्य मंचों पर सक्रिय कविता पाठ। नीरज 20th सदी के प्रसिद्ध और सफलतम मंचीय कवियों में से एक माने जाते है।
बाॅलीवुड के कई शानदार नगमें गोपाल दास नीरज की देन है। इनमें कारवां गुजर गया, लिखे जो खत तुझे, ए भाई जरा देख के चलो, यही अपराध हर बार करता हूं, काल का पहिया घूमे रे भईया काफी लोकप्रिय नगमें है। नीरज की 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।
पुरस्कार- गोपालदास नीरज को पद्मश्री, पद्मभूषण, यशभारती समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके है।
तो आईए आपको ज्यादा इंतजार न करवाते हुए उस कविता का दीदार करवाते है। इस कविता का शीर्षक है -
दोस्तों Poems में अद्भुत शक्ति होती है। जो काम एक Book नहीं करती वह काम महज एक कविता कर देती है। यूं तो हिन्दी साहित्य (Hindi Literature) काफी समृद्ध है, उसकी परम्परा, रीति, सौंदर्य, शास्त्र बहुत पुराना है।
आपके लिए एक ऐसी कविता लाया हूं जो हमेशा हौसला देगी, जो मुर्दे में भी जान डालने वाली ताकत रखती है।
इसकी हर एक पंक्ति, हर एक शब्द और उसके पीछें छुपे भाव को एक बार मन में सोचे तो आप पाएंगे कि कविता को पढने से पहले आप कुछ और थे और बाद में कुछ और।
यह कविता सदी के महानतम कवियों में से एक पद्म भूषण श्री गोपालदास नीरज की कविता है।
नाम - गोपाल दास ‘नीरज‘
जन्मकाल- 4 जनवरी 1925 से अब तक (जीवित)
ग्राम- पुरावली, इटावा, उत्तरप्रदेश।
विशेष- गत 50 वर्षों से काव्य मंचों पर सक्रिय कविता पाठ। नीरज 20th सदी के प्रसिद्ध और सफलतम मंचीय कवियों में से एक माने जाते है।
बाॅलीवुड के कई शानदार नगमें गोपाल दास नीरज की देन है। इनमें कारवां गुजर गया, लिखे जो खत तुझे, ए भाई जरा देख के चलो, यही अपराध हर बार करता हूं, काल का पहिया घूमे रे भईया काफी लोकप्रिय नगमें है। नीरज की 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।
पुरस्कार- गोपालदास नीरज को पद्मश्री, पद्मभूषण, यशभारती समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके है।
तो आईए आपको ज्यादा इंतजार न करवाते हुए उस कविता का दीदार करवाते है। इस कविता का शीर्षक है -
छिप छिप अश्रु बहाने वालों
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों!
मोती व्यर्थ लुटाने वालों!
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है? नयन सेज पर,
सोया हुआ आँख का पानी,
और टूटना है उसका ज्यों,
जागे कच्ची नींद जवानी,
गीली उमर बनाने वालों! डूबे बिना नहाने वालों!
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।
माला बिखर गई तो क्या है,
खुद ही हल हो गई समस्या,
आँसू गर नीलाम हुए तो,
समझो पूरी हुई तपस्या,
रूठे दिवस मनाने वालों! फटी क़मीज़ सिलाने वालों!
कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,
केवल जिल्द बदलती पोथी।
जैसे रात उतार चाँदनी,
पहने सुबह धूप की धोती,
वस्त्र बदलकर आने वालों! चाल बदलकर जाने वालों!
चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार कश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर,
तम की उमर बढ़ाने वालों! लौ की आयु घटाने वालों!
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गंध फूल की,
तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर,
खिड़की बन्द न हुई धूल की,
नफ़रत गले लगाने वालों! सब पर धूल उड़ाने वालों!
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है! -
श्री गोपालदास नीरज Shree Gopal Das Neeraj
लग्नेश यदि दशम स्थान में हो तो क्या होगा आपके जीवन का कैरियर और कर्म
ज्योतिषीय ज्ञान
दशम स्थान गत लग्नेश
कुंडली का सर्वाधिक पवित्र व महत्वपूर्ण स्थान है दशम स्थान | यदि किसी स्थान से दशम स्थान बली हो तो वह स्थान विशेष शाश्वत स्वाभाव का माना जाता है | उदाहरणार्थ दूसरे स्थान का विश्लेषण किया जाये तो दूसरे स्थान से दशम स्थान, अर्थात एकादश स्थान पर ध्यान देना चाहिए | यदि एकादश स्थान में शुभ गृह हों तथा एकादश स्थान बली हो तो दूसरे स्थान को स्वतः बल प्राप्त हो जाता है | इसी प्रक्रार यदि षष्ठ स्थान को जानना चाहें तो षष्ट स्थान से दशम स्थान अर्थात तृतीय स्थान को देखें, यदि तृतीय स्थान बली है तो यह कहा जा सकता है कि षष्ट स्थान स्वतः बली हो गया है तथा जातक रोगमुक्त जीवन प्राप्त करेगा |
इसलिए लग्न का बलाबल दशम स्थान से देखना होगा | दशम भाव गत लग्नेश अद्वितीय बल प्राप्त करता है यह ऐसे व्यक्ति का सूचक है जो स्वाभाविक भाग्यवान है तथा जो शुभ गुणों से युक्त होगा व जीवन में उन्नति करेगा ऐसा व्यक्ति जो कुशल प्रशासक बनेगा | ऐसे व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अपने पूर्वकर्मों के शुभ फलों का उपभोग करने ही इस जीवन में जन्म लेते हैं |
· दशम स्थान गत लग्नेश भाव-संधि में नहीं होना चाहिए, ऐसा होने पर लग्न का बलक्षय होता है | इस संबंध में किसी भी केंद्र में लग्नेश भाव-संधि में स्थित नहीं होना चाहिए | भाव-संधि दो प्रकार की होति है |
· आरोह भाव-संधि
· अवरोह भाव-संधि
जब गृह नवम स्थान से दशम स्थान में प्रवेश कर रहा हो, तो नवम भाव के उपरांत प्रथम भाव-संधि को आरोह भाव-संधि कहते हैं |
जब कोई गृह भाव-मध्य से अंतिम दस अंशो में जा रहा हो तो इसे अवरोह भाव-संधि कहते हैं |
शुब गृह आरोह भाव-संधि में तथा क्रूर गृह अवरोह भाव-संधि में स्थित होने चाहिए |
जब कोई गृह भावारम्भ बिंदु पर स्थित हो तो वह सर्वाधिक बली गृह बन जाता है | भावारम्भ स्वामी सर्वाधिक बली स्वामी है, वे स्थानविशेष के लिए सर्वप्रथम विश्वस्त उत्तरदायी गृह है | वे उस स्थान के अधिपति से भी अधिक मग्त्वापूर्ण होते हैं |
उदहारण
यदि सप्तम स्थान मकर राशी का हो तथा भावारम्भ बिंदु पांच अंश व बयालीस मिनट पर हो, जो उत्तरा शाढा नक्षत्र (जिसका स्वामी सूर्य है) में आता है, तो सप्तम स्थान का प्रथम दायित्व सूर्य पर होगा न कि शनि पर, हालाँकि वह राशीश है |
· अतः सूर्य पर दुष्प्रभाव देखने होंगे तथा वैवाहिक विलम्ब अथवा विच्छेद के लिए सूर्य ही उत्तरदायी होगा |
यदि स्थानाधिपति तथा भावारम्भ नक्षत्रेश सम- संबंध अथवा संयोग बनायें तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है | यदि महादाशाधिपति अंतर्दाशाधिपति स्थानविशेष के भावारम्भ नक्षत्रेश से युत हो, तो उस स्थान के कार्कतवों का फलित होना सुनिश्चित है |
शुभ गृह होने से दशम स्थान गत लग्नेश आरोह के समय में अतिशुभ माना जाता है | क्रूर गृह होने पर यह अवरोहम में शुभ माना जायेगा तथा भाव-संधि बिंदु में प्रत्येक गृह चाहे वह शुभ हो या क्रूर, शुभ होगा | हालाँकि दशम स्थान में लग्नेश अत्यंत बली माना जाता है, परन्तु वह दिग्बलाहीन नहीं होना चाहिए |
लग्नेश होकर शुक्र दशम स्थान गत होने पर जातक को दीर्घ, परन्तु निस्सार जीवन प्रदान करेगा | ऐसा दीर्घ जीवन किस प्रयोजन का होगा यदि इसके सहायक अवयव ही विद्यमान न हों |
मंगल या सूर्य की लग्नेश होकर दशम स्थान में स्थिति व्यक्ति को शुभ गुण युक्त अलौकिक भाग्यशाली तथा जीवन में सद्गुणों का भोगने वाला बनाती है | दशम स्थान कर्म स्थान होने से इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जातक इस संसार में उच्चकोटि या महत्व के कर्म करने हेतु जन्मा है, अर्थात कर्मयोगी होगा |
जातक को अत्यंत शुभ पूर्व पुण्य प्राप्त होगा | इस उद्देश्य हेतु पंचम नवम तथा क्रमशः उनके स्वामी व प्रतिस्थायियों में अन्य सहायक तत्व होने चाहिए | व्यक्ति सदैव सफल होगा तथा दूसरों के प्रति उसका व्यवहार अत्यंत सहायतापूर्ण होगा | व्यक्ति अल्पावस्था में ही जीविकोपार्जन प्रारंभ कर देगा |
जातक कि आर्थिक स्थिति सुद्रढ़ नहीं होगी, परन्तु उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होगा | इस हेतु लग्नेश का आरोग्यकारक चन्द्र से संबंध देखना होगा इससे व्यक्ति के जीवन में संभावित कष्टों कि मात्रा का भी अध्ययन किया जा सकता है | व्यक्ति स्वनिर्मित व्यक्तित्वा तथा जीवन में स्वनिर्मित व्यक्ति तथा स्वावलंबी होगा |
दशम स्थान गत लग्नेश केन्द्रधिपति दोष से मुक्त होना चाहिए सामान्यतः लग्नेश पर कदापि केन्द्रधिपति दोष नहीं लगता क्योंकि वह एक केंद्र के साथ साथ एक कोण का भी स्वामी होता है | तो ये दोष कब लागू होगा ?
यह केवल तभी संभव है जब लगेंश किसी अन्य केंद्र का भी स्वामी हो, जो केवल ब्रहस्पति तथा बुध अर्थात मिथुनम, कन्या, धनु व मीन लग्न के लग्नेश होने पर लागू हो सकता है |
दशम स्थान गत लग्नेश दर्शाता है कि जातक के जनम के पश्चात् उसके पिता को अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा | यह जातक के परिवार में एकमात्र पुत्र होने का भी सूचक है | इसके लिए लग्नेश की सूर्य से युति या द्रष्टि होनी चाहिए या नक्षत्रों का संबंध होने चाहिए |
यदि सूर्य लग्नेश होकर दशम स्थान में स्थित हो, तो जातक अपने पिता कि एकमात्र पुत्र संतति होगी | यह जातक के अपने पारिवारिक पारम्परिक व्यवसाय में संलग्न होने का भी सूचक है
दशम स्थान गत लग्नेश
कुंडली का सर्वाधिक पवित्र व महत्वपूर्ण स्थान है दशम स्थान | यदि किसी स्थान से दशम स्थान बली हो तो वह स्थान विशेष शाश्वत स्वाभाव का माना जाता है | उदाहरणार्थ दूसरे स्थान का विश्लेषण किया जाये तो दूसरे स्थान से दशम स्थान, अर्थात एकादश स्थान पर ध्यान देना चाहिए | यदि एकादश स्थान में शुभ गृह हों तथा एकादश स्थान बली हो तो दूसरे स्थान को स्वतः बल प्राप्त हो जाता है | इसी प्रक्रार यदि षष्ठ स्थान को जानना चाहें तो षष्ट स्थान से दशम स्थान अर्थात तृतीय स्थान को देखें, यदि तृतीय स्थान बली है तो यह कहा जा सकता है कि षष्ट स्थान स्वतः बली हो गया है तथा जातक रोगमुक्त जीवन प्राप्त करेगा |
इसलिए लग्न का बलाबल दशम स्थान से देखना होगा | दशम भाव गत लग्नेश अद्वितीय बल प्राप्त करता है यह ऐसे व्यक्ति का सूचक है जो स्वाभाविक भाग्यवान है तथा जो शुभ गुणों से युक्त होगा व जीवन में उन्नति करेगा ऐसा व्यक्ति जो कुशल प्रशासक बनेगा | ऐसे व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अपने पूर्वकर्मों के शुभ फलों का उपभोग करने ही इस जीवन में जन्म लेते हैं |
· दशम स्थान गत लग्नेश भाव-संधि में नहीं होना चाहिए, ऐसा होने पर लग्न का बलक्षय होता है | इस संबंध में किसी भी केंद्र में लग्नेश भाव-संधि में स्थित नहीं होना चाहिए | भाव-संधि दो प्रकार की होति है |
· आरोह भाव-संधि
· अवरोह भाव-संधि
जब गृह नवम स्थान से दशम स्थान में प्रवेश कर रहा हो, तो नवम भाव के उपरांत प्रथम भाव-संधि को आरोह भाव-संधि कहते हैं |
जब कोई गृह भाव-मध्य से अंतिम दस अंशो में जा रहा हो तो इसे अवरोह भाव-संधि कहते हैं |
शुब गृह आरोह भाव-संधि में तथा क्रूर गृह अवरोह भाव-संधि में स्थित होने चाहिए |
जब कोई गृह भावारम्भ बिंदु पर स्थित हो तो वह सर्वाधिक बली गृह बन जाता है | भावारम्भ स्वामी सर्वाधिक बली स्वामी है, वे स्थानविशेष के लिए सर्वप्रथम विश्वस्त उत्तरदायी गृह है | वे उस स्थान के अधिपति से भी अधिक मग्त्वापूर्ण होते हैं |
उदहारण
यदि सप्तम स्थान मकर राशी का हो तथा भावारम्भ बिंदु पांच अंश व बयालीस मिनट पर हो, जो उत्तरा शाढा नक्षत्र (जिसका स्वामी सूर्य है) में आता है, तो सप्तम स्थान का प्रथम दायित्व सूर्य पर होगा न कि शनि पर, हालाँकि वह राशीश है |
· अतः सूर्य पर दुष्प्रभाव देखने होंगे तथा वैवाहिक विलम्ब अथवा विच्छेद के लिए सूर्य ही उत्तरदायी होगा |
यदि स्थानाधिपति तथा भावारम्भ नक्षत्रेश सम- संबंध अथवा संयोग बनायें तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है | यदि महादाशाधिपति अंतर्दाशाधिपति स्थानविशेष के भावारम्भ नक्षत्रेश से युत हो, तो उस स्थान के कार्कतवों का फलित होना सुनिश्चित है |
शुभ गृह होने से दशम स्थान गत लग्नेश आरोह के समय में अतिशुभ माना जाता है | क्रूर गृह होने पर यह अवरोहम में शुभ माना जायेगा तथा भाव-संधि बिंदु में प्रत्येक गृह चाहे वह शुभ हो या क्रूर, शुभ होगा | हालाँकि दशम स्थान में लग्नेश अत्यंत बली माना जाता है, परन्तु वह दिग्बलाहीन नहीं होना चाहिए |
लग्नेश होकर शुक्र दशम स्थान गत होने पर जातक को दीर्घ, परन्तु निस्सार जीवन प्रदान करेगा | ऐसा दीर्घ जीवन किस प्रयोजन का होगा यदि इसके सहायक अवयव ही विद्यमान न हों |
मंगल या सूर्य की लग्नेश होकर दशम स्थान में स्थिति व्यक्ति को शुभ गुण युक्त अलौकिक भाग्यशाली तथा जीवन में सद्गुणों का भोगने वाला बनाती है | दशम स्थान कर्म स्थान होने से इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जातक इस संसार में उच्चकोटि या महत्व के कर्म करने हेतु जन्मा है, अर्थात कर्मयोगी होगा |
जातक को अत्यंत शुभ पूर्व पुण्य प्राप्त होगा | इस उद्देश्य हेतु पंचम नवम तथा क्रमशः उनके स्वामी व प्रतिस्थायियों में अन्य सहायक तत्व होने चाहिए | व्यक्ति सदैव सफल होगा तथा दूसरों के प्रति उसका व्यवहार अत्यंत सहायतापूर्ण होगा | व्यक्ति अल्पावस्था में ही जीविकोपार्जन प्रारंभ कर देगा |
जातक कि आर्थिक स्थिति सुद्रढ़ नहीं होगी, परन्तु उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होगा | इस हेतु लग्नेश का आरोग्यकारक चन्द्र से संबंध देखना होगा इससे व्यक्ति के जीवन में संभावित कष्टों कि मात्रा का भी अध्ययन किया जा सकता है | व्यक्ति स्वनिर्मित व्यक्तित्वा तथा जीवन में स्वनिर्मित व्यक्ति तथा स्वावलंबी होगा |
दशम स्थान गत लग्नेश केन्द्रधिपति दोष से मुक्त होना चाहिए सामान्यतः लग्नेश पर कदापि केन्द्रधिपति दोष नहीं लगता क्योंकि वह एक केंद्र के साथ साथ एक कोण का भी स्वामी होता है | तो ये दोष कब लागू होगा ?
यह केवल तभी संभव है जब लगेंश किसी अन्य केंद्र का भी स्वामी हो, जो केवल ब्रहस्पति तथा बुध अर्थात मिथुनम, कन्या, धनु व मीन लग्न के लग्नेश होने पर लागू हो सकता है |
दशम स्थान गत लग्नेश दर्शाता है कि जातक के जनम के पश्चात् उसके पिता को अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा | यह जातक के परिवार में एकमात्र पुत्र होने का भी सूचक है | इसके लिए लग्नेश की सूर्य से युति या द्रष्टि होनी चाहिए या नक्षत्रों का संबंध होने चाहिए |
यदि सूर्य लग्नेश होकर दशम स्थान में स्थित हो, तो जातक अपने पिता कि एकमात्र पुत्र संतति होगी | यह जातक के अपने पारिवारिक पारम्परिक व्यवसाय में संलग्न होने का भी सूचक है
वो चिट्ठी जिसने गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम को पहुंचा दिया जेल
सन 2002 में एक साध्वी के द्वारा लिखी गई वो चिठ्ठी जिसके आधार पर बाबा राम रहीम पर कार्रवाई की गई ...नीचे पढ़ें!
2002 में एक साध्वी द्वारा लिखी गई चिट्ठी ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को यौनशोषण मामले में जेल भिजवा दिया। इस चिट्ठी के आधार पर हुई जांच ने आज गुरमीत राम रहीम को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। यही थी वह चिट्ठी जो साध्वी ने लिखी थी....
अगर नए कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे तो जैसे जवानी बीत रही है वैसे ही बुढापा भी बीतेगा।
✍पुरानी पेंशन
*जवाब* की आशा के साथ
1. यह कि हमारे कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन बहाली 24 सूत्रीय मांगपत्र में एक नंबर पर क्यों नही रखते?
2. यहकि हमारे संगठन पुरानी पेंशन पर टेबल टाक क्यों नहीं करते ? यदि हुई है तो बताते क्यों नहीं?
" 1 अप्रैल 2005 के बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद कर NPS लागू कर दी गई ।
ज्ञातव्य है कि NPS और ओपीएस अर्थात पुरानी पेंशन स्कीम है क्या?"
पुरानी पेंशन योजना
*1* पुरानी पेंशन योजना कर्मचारी द्वारा की गई सेवाओं के फलस्वरूप बिना किसी अंशदान के सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
*2* पुरानी पेंशन योजना की कोई धनराशि शेयर मार्केट के अधीन नहीं होती है।
*3* पुरानी पेंशन योजना पर सरकार पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है ।
*4* पुरानी पेंशन के तहत धनराशि जीपीएफ कटौती को आवश्यकतानुसार कर्मचारी लोन के रूप में आहरित कर सकता है।
*5* पुरानी पेंशन योजना में प्रतिवर्ष दो बार महंगाई भत्ता प्राप्त होता है।
*6* पुरानी पेंशन योजना में पे कमीशनके अनुसार पेंशन वृद्धि होती है।
*7* पुरानी पेंशन में फंड मैनेजर की कोई व्यवस्था नहीं है।
*8* पुरानी पेंशन में पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था पूर्णतया सरकार द्वारा की जाती है।
*9* सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी का जो वेतन होता है उसका अर्ध वेतन पेंशन के रूप में निर्धारित हो जाता है।
*10* *सेवानिवृत्ति के समय 16 माह का वेतन कर्मचारी को ग्रेच्यूटी के रूप में प्रदान किया जाता है ।
*11* ग्रेच्युटी पर कोई टैक्स नहीं लगता है ।
* *नवीन पेंशन योजना**
*1* एनपीएस नवीन पेंशन योजना नई परिभाषित अंशदाई पेंशन योजना में कर्मचारी के वेतन एवं DA का 10% की कटौती की जाती है ।
*2* नव परिभाषित पेंशन योजना शेयर मार्केट आधारित योजना है ।
*3* NPS में कोई निश्चित पेंशन धनराशि नहीं है अर्थात किसी माह 10000 किसी माह 50000 पेंशन मिल सकती है नहीं भी मिल सकती है।
*4* नवीन पेंशन योजना पूरी तरह शेयर मार्केट पर आधारित होने के कारण सरकार कोई सुरक्षा की गारंटी नहीं प्रदान करती है ।
*5* नवीन पेंशन योजना के तहत काटी गई धनराशि से कोई पैसा आहरित नहीं कर सकते हैं यदि कर सकते हैं तो तीन बार प्रक्रिया जटिल है।
*6* नवीन पेंशन योजना में पेंशन प्लान लेने के बाद महंगाई भत्ता इत्यादि देय नहीं है ।
*7* पेंशन योजना को तीन फण्ड मैनेजर sbi, uti, lic ही संचालित करेंगे सरकार से कोई मतलब न रहेगा ।
मैनजरों के वेतन व भत्ते कर्मचारी द्वारा जमा की गई पेंशन हेतु धनराशि से काटे जाएंगे ।
*8* नवीन पेंशन योजना में पारिवारिक पेंशन आपके बचे हुए फंड के धन से ही उपलब्ध कराई जाती है ।
*9* कर्मचारी 60 वर्ष या 50 वर्ष सरकार के अधीन हो कर सेवा करेंगे और सरकार उन्हें NSDL प्राइवेट कंपनी के सहारे छोड़ कर अपना पल्ला झाड़ लेगी।
स्वाभिमान सम्मान कर्मचारी का खतरे में है *बुढ़ापा खतरे* में है या कम शब्दों में कहें तो हमारा सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य खतरे में है आज की संस्कृति में आने वाले समय की संस्कृति में जमीन आसमान का नहीं दिन रात का अंतर होगा आनेवाले समय में कोई किसी की सेवा नही करेगा इसलिए हमारा बुढ़ापा हमारा भविष्य खतरे में है
वर्तमान में हमारी सैलरी पर्याप्त है फिर भी हम माह के अन्तमे सैलरी की प्रतीक्षा करने लगते हैं अतः हम बुढ़ापे के लिए बचत नही कर पा रहे हैं।
न कर पाएंगे रिटायरमेंट के बाद न वेतन होगा न ही पेंशन होगी चिन्तन कीजिये जीवन का स्वरुप क्या होगा बुढ़ापा सम्मान से नही कटेगा दुर्दिन होंगे
जरा सोचिए
हमारी समस्याहै लड़ेगा कौन?
हमारा दर्द दूर करेगा कौन ,?
दूसरा कोई नहीं हमे ही संघर्ष करना होगा
पश्चिम बंगाल केरल व त्रिपुरा में लागू तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं?
*6th पे कमीशन ने कहा था पेंशन कर्मचारी का लंबित वेतन है*
अतः आये सभी विभाग के कर्मचारियों का एक संगठन बनाकर पुरानी पेंशन के लिए एक साथ संघर्ष करें ।
अभी नही तो कभी नहीं.....….......
*जवाब* की आशा के साथ
1. यह कि हमारे कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन बहाली 24 सूत्रीय मांगपत्र में एक नंबर पर क्यों नही रखते?
2. यहकि हमारे संगठन पुरानी पेंशन पर टेबल टाक क्यों नहीं करते ? यदि हुई है तो बताते क्यों नहीं?
" 1 अप्रैल 2005 के बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन बंद कर NPS लागू कर दी गई ।
ज्ञातव्य है कि NPS और ओपीएस अर्थात पुरानी पेंशन स्कीम है क्या?"
पुरानी पेंशन योजना
*1* पुरानी पेंशन योजना कर्मचारी द्वारा की गई सेवाओं के फलस्वरूप बिना किसी अंशदान के सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
*2* पुरानी पेंशन योजना की कोई धनराशि शेयर मार्केट के अधीन नहीं होती है।
*3* पुरानी पेंशन योजना पर सरकार पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है ।
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*5* पुरानी पेंशन योजना में प्रतिवर्ष दो बार महंगाई भत्ता प्राप्त होता है।
*6* पुरानी पेंशन योजना में पे कमीशनके अनुसार पेंशन वृद्धि होती है।
*7* पुरानी पेंशन में फंड मैनेजर की कोई व्यवस्था नहीं है।
*8* पुरानी पेंशन में पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था पूर्णतया सरकार द्वारा की जाती है।
*9* सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी का जो वेतन होता है उसका अर्ध वेतन पेंशन के रूप में निर्धारित हो जाता है।
*10* *सेवानिवृत्ति के समय 16 माह का वेतन कर्मचारी को ग्रेच्यूटी के रूप में प्रदान किया जाता है ।
*11* ग्रेच्युटी पर कोई टैक्स नहीं लगता है ।
* *नवीन पेंशन योजना**
*1* एनपीएस नवीन पेंशन योजना नई परिभाषित अंशदाई पेंशन योजना में कर्मचारी के वेतन एवं DA का 10% की कटौती की जाती है ।
*2* नव परिभाषित पेंशन योजना शेयर मार्केट आधारित योजना है ।
*3* NPS में कोई निश्चित पेंशन धनराशि नहीं है अर्थात किसी माह 10000 किसी माह 50000 पेंशन मिल सकती है नहीं भी मिल सकती है।
*4* नवीन पेंशन योजना पूरी तरह शेयर मार्केट पर आधारित होने के कारण सरकार कोई सुरक्षा की गारंटी नहीं प्रदान करती है ।
*5* नवीन पेंशन योजना के तहत काटी गई धनराशि से कोई पैसा आहरित नहीं कर सकते हैं यदि कर सकते हैं तो तीन बार प्रक्रिया जटिल है।
*6* नवीन पेंशन योजना में पेंशन प्लान लेने के बाद महंगाई भत्ता इत्यादि देय नहीं है ।
*7* पेंशन योजना को तीन फण्ड मैनेजर sbi, uti, lic ही संचालित करेंगे सरकार से कोई मतलब न रहेगा ।
मैनजरों के वेतन व भत्ते कर्मचारी द्वारा जमा की गई पेंशन हेतु धनराशि से काटे जाएंगे ।
*8* नवीन पेंशन योजना में पारिवारिक पेंशन आपके बचे हुए फंड के धन से ही उपलब्ध कराई जाती है ।
*9* कर्मचारी 60 वर्ष या 50 वर्ष सरकार के अधीन हो कर सेवा करेंगे और सरकार उन्हें NSDL प्राइवेट कंपनी के सहारे छोड़ कर अपना पल्ला झाड़ लेगी।
स्वाभिमान सम्मान कर्मचारी का खतरे में है *बुढ़ापा खतरे* में है या कम शब्दों में कहें तो हमारा सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य खतरे में है आज की संस्कृति में आने वाले समय की संस्कृति में जमीन आसमान का नहीं दिन रात का अंतर होगा आनेवाले समय में कोई किसी की सेवा नही करेगा इसलिए हमारा बुढ़ापा हमारा भविष्य खतरे में है
वर्तमान में हमारी सैलरी पर्याप्त है फिर भी हम माह के अन्तमे सैलरी की प्रतीक्षा करने लगते हैं अतः हम बुढ़ापे के लिए बचत नही कर पा रहे हैं।
न कर पाएंगे रिटायरमेंट के बाद न वेतन होगा न ही पेंशन होगी चिन्तन कीजिये जीवन का स्वरुप क्या होगा बुढ़ापा सम्मान से नही कटेगा दुर्दिन होंगे
जरा सोचिए
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दूसरा कोई नहीं हमे ही संघर्ष करना होगा
पश्चिम बंगाल केरल व त्रिपुरा में लागू तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं?
*6th पे कमीशन ने कहा था पेंशन कर्मचारी का लंबित वेतन है*
अतः आये सभी विभाग के कर्मचारियों का एक संगठन बनाकर पुरानी पेंशन के लिए एक साथ संघर्ष करें ।
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गैस सिलेंडर लेने से पहले देख ले ये तारीख, ताकि आप रहे सुरक्षित
अपने परिवार की सुरक्षा के लिए 2 मिनिट का समय
निकाल कर इसे अवश्य पढ़े...!!!
L.P.G.गैस सिलेण्डर की भी "एक्सपायरी डेट" होती है।
एक्सपायरी डेट निकलने के बाद गैस सिलेण्डर को इस्तेमाल करना बम की तरह खरतनाक हो सकता है। आमतौर पर गैस सिलेण्डर की रिफील लेते समय उपभोक्ताओं का ध्यान इसके वजन और सील पर ही होता है।
उन्हें सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट की जानकारी ही नहीं होती।
इसी का फायदा एलपीजी की आपूर्ति करने वाली कंपनियां उठाती हैं और धड़ल्ले से एक्पायरी डेट वाले सिलेण्डर रिफील कर हमारे घरों तक पहुंचाती हैं।
यहीं कारण है कि गैस सिलेण्डरों से हादसे होते हैं।
कैसे पता करें एक्सपायरी डेट->
सिलेण्डर के उपरी भाग पर उसे पकड़ने के लिए गोल रिंग होती है और इसके नीचे तीन पट्टियों में से एक पर काले रंग से सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट अंकित होती है। इसके तहत अंग्रेजी में A, B, C तथा D अक्षर अंकित होते है तथा साथ में दो अंक लिखे होते हैं।
A अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च),
B साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून),
C साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्बर)
तथा
D साल की चौथी तिमाही अर्थात अक्टूबर से दिसंबर को दर्शाते हैं।
इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं।
यानि यदि सिलेण्डर पर A 11 लिखा हुआ हो तो सिलेण्डर
की एक्सपायरी मार्च 2011 है। इस सिलेण्डर का "मार्च 2011" के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है।
इस प्रकार के सिलेण्डर बम की तरह कभी भी फट सकते हैं।
ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के
एक्सपायर सिलेण्डरों को लेने से मना कर दें तथा आपूर्तिकर्त्ता एजेंसी को इस बारे में सूचित करें !
Note : कृप्या घरेलू सुरक्षा के मद्देनजर इस पोस्ट को अधिक-अधिक LIKE करे !!
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A अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च),
B साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून),
C साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्बर)
तथा
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इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं।
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की एक्सपायरी मार्च 2011 है। इस सिलेण्डर का "मार्च 2011" के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है।
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Note : कृप्या घरेलू सुरक्षा के मद्देनजर इस पोस्ट को अधिक-अधिक LIKE करे !!
मौलिक अधिकार बना निजता का अधिकार, इससे आपको क्या फर्क पड़ेगा
मौलिक अधिकार बना निजता का अधिकार, इससे आपको क्या फर्क पड़ेगा
भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को कई मौलिक अधिकार दिए हैं। बहस इस बात को लेकर थी कि क्या निजता का अधिकार, मौलिक अधिकारों में आता है या नहीं। आखिरकार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से इसे अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है।
इस फैसले का आधार से कोई संबंध नहीं
सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का आधार से कोई संबंध नहीं है। 9 जजों की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सिर्फ निजता के अधिकार पर अपना फैसला सुनाया है। इस बेंच में आधार पर कोई बात नहीं हुई। आधार निजता के अधिकार का हनन है या नहीं, इस पर तीन जजों की एक अन्य बेंच सुनवाई करेगी।
क्या हैं मौलिक अधिकार
भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को कुछ मौलिक अधिकार दिए हैं। इन मौलिक अधिकार को व्यक्ति के विकास के लिए अहम माना जाता है।
1. समानता का अधिकार
2. स्वतंत्रता का अधिकार
3. शोषण के खिलाफ अधिकार
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
5. सांस्कृति और शिक्षा का अधिकार
6. संवैधानिक उपचार का अधिका
इन जजों ने सुनाया फैसला
इन नौ जजों की बेंच ने निजता को मौलिक अधिकार माना।
1. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर
2. जस्टिस चमलेश्वर
3. जस्टिस आरके अग्रवाल
4. जस्टिस एसए बोबड़े
5. जस्टिस एएम सापरे
6. जस्टिस आरएफ नरिमन
7. जस्टिस जीवाई चंद्रचूड़
8. जस्टिस संजय किशन कौल
9. जस्टिस एस एब्दुल नजीर
'सुप्रीम' फैसले का क्या फर्क पड़ेगा?
इस मामले में भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी से बात की गयी। उन्होंने बताया कि अब किसी मामले में अगर आधार से जुड़ी या कोई अन्य निजी जानकारी मांगता है तो आप आपत्ति जता सकते हैं। अगर आपको लगता है कि फलां व्यक्ति आपके निजी जीवन में दखल दे रहा है तो आप कोर्ट में जाकर याचिका पेश कर सकते हैं और कोर्ट उस पर सुनवाई करेगी। इसमें आंखों का रंग, डीएनए, ब्लड से जुड़ी जानकारी, फिंगर प्रिंट आदि सरकार अपने पास रख सकती है। सरकार हमें विश्वास दिलाएगी कि यह डाटा चोरी नहीं होगा और हमारी निजता भंग नहीं होगी।
सरकारी योजनाओं में निजी जानकारी का क्या?
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी अब आधार जरूरी हो गया है। आप नाम, पता देने से तो इनकार नहीं कर सकते, लेकिन स्वामी के अनुसार अन्य जानकारियां देने से उपभोक्ता मना कर सकते हैं। विवाद की स्थिति में उपभोक्ता अदालत की शरण में जा सकता है और कह सकता है कि हमें विश्वास दिलाएं कि हम जो जानकारी दे रहे हैं वह किसी और के पास नहीं जाएगा।
मोबाइल फोन नंबर से आधार लिंक करना जरूरी है?
सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार बना दिया है तो ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि जिस तरह से निजी टेलिकॉम कंपनियां मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने की बात कर रही हैं उसका क्या होगा। इस मामले में सुब्रह्मण्यम स्वामी में कहा कि जब आधार पर ही चुनौती हो जाएगी तो इन कंपनियों को भी रुकना पड़ेगा।
निजता की श्रेणी कैसे तय होगी?
निजता की श्रेणी को लेकर भी सवाल हैं। क्योंकि हो सकता है किसी व्यक्ति के लिए उसकी कोई खास जानकारी निजता की श्रेणी में आती हो, लेकिन दूसरों के लिए नहीं। ऐसे में निजता की श्रेणी कैसे तय हो। इस बारे में भी स्वामी से बात करते हुए कहा कि इसके बारे में भी अदालत ही तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया है। नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मती से निजता के अधिकार पर यह फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि निजता एक मौलिक अधिकार है। निजता राइट टू लाइफ का हिस्सा है। निजता के हनन करने वाले कानून गलत हैं। कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है और यह संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के तहत आता है। मामले में बहस के बाद कोर्ट ने गत दो अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब पांच न्यायाधीशों की पीठ आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
यूं शुरू हुई निजता के अधिकार पर बहस
निजता के अधिकार पर बहस इसलिए शुरू हुई, क्योंकि आधार योजना को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलील है कि बायोमीट्रिक डाटा और सूचनाएं एकत्र करने से उनके निजता के अधिकार का हनन होता है। सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व फैसलों में आठ न्यायाधीशों और छह न्यायाधीशों की पीठ कह चुकी है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसे में भारत सरकार और याचिकाकर्ताओं ने निजता के अधिकार का मुद्दा बड़ी पीठ के द्वारा सुने जाने की अपील की थी। इस पर नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित हुई। पीठ के अध्यक्ष प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर हैं। उनके अलावा पीठ में जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आरके अग्रवाल, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस एएम सप्रे और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल है
विरोध में सरकार की दलीलें
-ये सन्निहित अधिकार है, लेकिन ये कॉमन लॉ में आता है।
-निजता हर मामले की परिस्थितियों पर तय होती है।
-संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर इसे मौलिक अधिकारों में शामिल नहीं किया था।
-कोर्ट मौलिक अधिकार घोषित करता है, तो यह संविधान संशोधन होगा जिसका कोर्ट को अधिकार नहीं है।
-आंकड़े एकत्रित करना निजता के तहत नहीं आता।
-निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया, तो तकनीक का सहारा लेकर गुड गर्वनेंस के प्रयास रुक जाएंगे।
यह भी पढ़ेंः अब आधार कार्ड को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने पर होगी SC में सुनवाई
समर्थन में याचिकाकर्ताओं की दलीलें
-निजता सम्मान से जीवन जीने के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
-मुख्य अधिकार मौलिक अधिकार है, तो उसका हिस्सा भी माना जाएगा।
-कोर्ट कई फैसलों में निजता के अधिकार को मान्यता दे चुका है।
-निजता को स्वतंत्रता व जीवन के अधिकार से अलग करके नहीं देख सकते।
-अमेरिका और अन्य देशों में निजता को मौलिक अधिकार माना गया है।
होने जा रहा है अन्य पिछड़ा वर्ग में बदलाव
दैनिक जागरण संपादकीय
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क्यों हो परेशान जब आप कम सकते हो ऑनलाइन घर बैठे कोई मार्केटिंग नहीं कोई इन्वेस्टमेंट नही
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कुंडली के बारह भाव और उनसे क्या जानें- दोस्तों मैंने पिछले पोस्ट में कुंडली के भाव कैसे देखें ये बताया था अब ये जानेंगे की प्रत्येक भाव...



















